जमशेदपुर : विश्व पृथ्वी दिवस पूरा देश और दुनिया मना रहा है. इस कड़ी में लोग पर्यावरण और धरती को बचाने के लिए काफी मेहनत करते है, लेकिन हाल के दिनों में टाटा स्टील की ओर से की गयी पहल के बाद जमशेदपुर में स्थिति पहले से बेहतर हो रही है. हालात यह है कि एयर क्वालिटी को सुधार करने के लिए भी कदम उठाया जा रहा है. (नीचे भी पढ़ें)
टाटा स्टील का दावा है कि वर्ष 2017-2018 के बीच 29 फीसदी डस्ट एमिशन में कमी आयी है. तकनीक का इस्तेमाल कर प्रदूषण को रोकने में कामयाबी मिली है जबकि डस्ट एमिशन यानी कण को छोड़ने की गति मेंभी कमी लायी है. इसके अलावा धरती को बचाने के लिए करीब 5.6 लाख पौधारोपण किया गया है. जुगसलाई मकदंप में भी नयी व्यवस्था की गयी है. (नीचे भी पढ़ें)
सीआरेम बारा कांप्लेक्स के पास 11.8 एकड़ जमीन में पौधारोपण किया गया है. जमशेदपुर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की दिशा में भी अहम कदम उठाया गया है. टाटा स्टील एक स्थायी पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान करने की अपनी खोज में अपशिष्ट और उप-उत्पादों से मूल्य निर्माण में अग्रणी रहा है. टाटा स्टील का लक्ष्य सर्कुलर इकोनॉमी के 3आर (रिड्यूस, रीयूज और रीसायकल) सिद्धांतों का उपयोग करते हुए ‘जीरो वेस्ट’ लक्ष्य है. (नीचे भी पढ़ें)
टाटा स्टील ने 25+ उत्पाद श्रेणियों में फैले 15 मिलियन टन के उप-उत्पादों को संभालते हैं. स्टील स्लैग (बेसिक ऑक्सीजन फर्नेस स्लैग) के त्वरित अपक्षय की इन-हाउस विकसित प्रक्रिया के माध्यम से, हमने टाटा एग्रेटो के रूप में ब्रांडेड विनिर्मित समुच्चय विकसित किए. यह भारत का पहला स्टील स्लैग-आधारित ब्रांडेड उत्पाद है, जिसका व्यापक रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में उपयोग किया जाता है, जिसने प्राकृतिक समुच्चय को संरक्षित करने और हमारे पर्यावरण पदचिह्न को कम करने में मदद की है. (नीचे भी पढ़ें)
स्टील स्लैग फाइन्स पर आधारित एक अन्य उत्पाद टाटा निर्माण को ईंट निर्माण उद्योग के लिए पसंदीदा कच्चे माल के रूप में स्थापित किया गया है. कृषि क्षेत्र का समर्थन करने के उद्देश्य से अभिनव पहलों के माध्यम से, एक बहु-पोषक मिट्टी बढ़ाने वाला धुरवी गोल्ड, विकसित किया गया है, जो कम लागत वाली मिट्टी कंडीशनिंग समाधान प्रदान करने में मदद करता है. (नीचे भी पढ़ें)
स्टील स्लैग के अलावा, ब्लास्ट फर्नेस स्लैग से विभिन्न डाउनस्ट्रीम उत्पाद विकसित किए गए हैं, जैसे ग्राउंड ग्रेन्युलेटेड ब्लास्ट फर्नेस स्लैग (जीजीबीएस) और सक्रिय जीजीबीएस, जिनका उपयोग कंक्रीट बनाने के लिए साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (ओपीसी) के आंशिक प्रतिस्थापन के रूप में किया जा सकता है, जिससे सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. जमशेदपुर में की गयी व्यवस्था एक उदाहरण पूरे देश के लिए बन चुका है. पानी की खपत में भी टाटा स्टील ने कमी लायी है, जिसके तहत 2.18 घन मीटर पानी का इस्तेमाल किया गया है.



