
शार्प भारत
जमशेदपुर : टाटा समूह को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्राइब्यूनल (एनसीएलएटी) ने बड़ा झटका दिया है. एनसीएलएटी ने टाटा संस के चेयरमैन के पद से सायरस मिस्त्री को हटाये जाने को गलत करार दिया है और उनको फिर से बहार करने का आदेश दिया है. इसके अलावा एन चंद्रशेखरन, जो वर्तमान में टाटा समूह के चेयरमैन है, उनको बनाये जाने को भी गलत करार दिया है. बुधवार को दिये गये आदेश में एनसीएलएटी ने कहा है कि इस आदेश को तत्काल लागू कर दिया जाये. इसके बाद टाटा समूह के समक्ष बड़ी चुनौती सामने आ गयी है. वहीं, अब टाटा समूह के पास सिर्फ हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प बच गया है. इस मामले में अब उच्च अदालत का कोई रोक आयेगा तब जाकर ही किसी तरह का रोक लग सकता है नहीं तो सायरस मिस्त्री को चेयरमैन के पद पर आसीन कराना होगा. एनसीएलएटी के जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय ने अपने आदेश में कहा है कि एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति भी गलत थी.
चार साल के बाद रतन टाटा से ही नहीं बन रही थी सायरस की, कर दिये गये बाहर
रतन टाटा ने अपने स्थान पर 2012 में सायरस मिस्त्री को टाटा समूह का चेयरमैन बनाया था. इसके बाद 24 अक्तूबर 2016 को एक मीटिंग के दौरान ही उिनको हटाने का आदेश दे दिया था. 20 दिसंबर 2016 को टाटा संस और अन्य लोगों के खिलाफ सायरस मिस्त्री ने एक मुकदमा नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (एनसीएलटी) में दायर किया था और उनको गलत तरीके से हटाने का आरोप लगाया था. इस मामले में सुनवाई करते हुए एनसीएलटी ने सायरस मिस्त्री को हटाये जाने को सही करार दिया था. इसके बाद इसको अपीलेट ऑथोरिटी यानी एनसीएलएटी में दायर कर दिया था, जिसमें टाटा समूह के खिलाफ फैसला आया है. सायरस मिस्त्री की ओर से यह आरोप लगाया गया था कि टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन रतन टाटा ने काम में हस्तक्षेप किया था और गलत तरीके से उनको निष्कासित कर दिया था. इसके अलावा शेयरधारकों के अधिकार का भी हनन करने का आरोप लगाया था.





