
Chakuliya : चाकुलिया के पुराना बाजार स्थित चावोवीरो मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा के तीसरे दिन कथावाचक रामशंकर महराज ने कहा कि रूप, धन और बल का अभिमान नहीं होना चाहिए. अभिमान भक्ति का करें कि भगवान हमारे स्वामी हैं और हम उनके दास. इससे जीवन कल्याण होगा. अपने बच्चों का नामकरण अपने गुरुदेव से करना चाहिए. अपने बच्चों का नाम भगवान के नाम से रखें, इससे नाम पुकारने पर भगवान का नाम आता है. जीवन में भगवान का नाम लेने से पाप का नाश होता है. अक्षर का भी नामकरण में महत्व होता है. आनंद ही ब्रम्ह का स्वरूप है. राम नाम ही धाम है. भगवान राम आनंद के सिन्धु है. जीवन में सुख और आनंद भगवान की भक्ति से ही मिलेगा. राम नाम से ही जीवन को सुख धाम की प्राप्ति होगी. संसार दुखों का घर है और संसार के सभी जीव आनंद और सुख खोजते हैं, जो संसार में नहीं मिलेगा. सुख और आनंद चाहिए तो भगवान की शरण में जायें. ‘मिलता है सच्चा सुख केवल सिया राम तुम्हारे चरणों में …’ गीत पर उपस्थित श्रोता भक्ति में डूब गये.

कथा को आगे बढ़ाते हुए रामशंकर जी महाराज ने कहा कि श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं. भक्ति में अभिमान नहीं होनी चाहिए, भक्ति में अभिमान आये तो भगवान भी दूर होते हैं. कहा कि संसार के मोह माया के चक्कर में हम अपने असली घर और माता पिता को ही भूल गये हैं. हमारे माता-पिता सीता और राम हैं. मन को अपने माता-पिता की सेवा की और ले जायें. जीवन को मोक्ष मिलेगा. मां के हृदय मे प्रेम और करुणा होती है. राम और सीता ने लोगों के कल्याण के लिए धरती पर अवतार लिया है. राजा का कर्तव्य है प्रजा के दुखों और कष्टों का निवारण करना, परंतु आज के राजा वैसे नहीं है. धन्य हैं पहले के राजा कि अपनी प्रजा का दुख हरने के लिए अपने कंधे पर हल लिए बैल बनकर भूमि को जोता था. ‘धरती सिया सुख दिया जनकपुर बाजे बधईया …’ भजन पर श्रोता झूम उठे. जनक राजा और रानी ने धरती पर हल चलाते ही धरती से माता-सिता के अवतार पर स्थानीय समाज सेवी बासु रुंगटा और रानी के रूप में उनकी पत्नी सरोज रुंगटा ने भव्य झांकी निकाली. मौके पर लोगों ने चॉकलेट बांटकर एक दूसरे को माता सीता की कथा में अवतार प्रसंग पर बधाइयां दी. इस अवसर पर शंकर रुंगटा, गणेश रुंगटा, ओम प्रकाश रुंगटा, परमेश्वर रुंगटा, केशव रुंगटा, कमल रुंगटा, महावीर रुंगटा, विजय रुंगटा, चन्द्रदेव महतो, रविन्द्र नाथ मिश्रा, विनीत रुंगटा, कौशल रुंगटा, पतित पावन दास, लक्ष्मी नारायण दास, कमल खंडेलवाल, ब्रम्हदत्त अग्रवाल समेत काफी संख्या में श्रोता उपस्थित थे.







