
जमशेदपुर : टाटा स्टील ने बुरे दौर से गुजर रही है. देश और दुनिया में छायी मंदी का असर अब जाकर दिखने लगा है. इसके तहत टाटा स्टील ने वित्तीय वर्ष 2019-2020 के तीसरे तिमाही यानी 1 अप्रैल 2019 से लेकर 31 दिसंबर 2019 का वित्तीय परिणाम घोषित कर दिया है. इस वित्तीय परिणाम के तहत कंपनी ने कुल 1229 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया है. इसी आलोच्य अवधि में पिछले वित्तीय वर्ष 2018-2019 के 1 अप्रैल 2019 से लेकर 31 दिसंबर 2019 तक कंपनी ने 1753 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था, लेकिन इस साल चालू वित्तीय वर्ष में 1229 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया है. यह पूरे समूह का आंकड़ा है. वैसे भारतीय ऑपरेशन की बात की जाये तो टाटा स्टील ने भारतीय ऑपरेशन में मुनाफा का सिलसिला जारी रखते हुए 1194 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया है. वैसे पिछले वित्तीय वर्ष में भारत का मुनाफा 2253 करोड़ रुपये था, जो घटकर इस साल 1194 करोड़ रुपये हो गया है. वैसे टाटा स्टील ने अपना प्रोडक्शन बढ़ाने में कामयाबी हासिल की है. इसके तहत कंपनी का प्रोडक्शन वित्तीय वर्ष 2019-2020 में पिछले वित्तीय वर्ष में 4.38 मिलियन टन का प्रोडक्शन किया था, वहीं इस साल 4.47 मिलियन टन तक का प्रोडक्शन कंपनी ने भारत में किया है जबकि समेकित यानी पूरे टाटा स्टील समूह ने पिछले वित्तीय वर्ष 2018-2019 में 6.71 मिलियन टन और 2019-2020 में 6.99 मिलियन टन तक का प्रोडक्शन किया है. वैसे अगर स्टील की डिलीवरी की बात की जाये तो इसमें बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी है. पिछले साल स्टील की डिलीवरी 6.47 मिलियन टन के करीब हुआ था, वहीं इस वित्तीय वर्ष में 7.31 मिलियन टन तक हुआ है. वैसे भारत में भी स्टील की डिलीवरी बढ़ी है, जिसके तहत वित्तीय वर्ष 2018-2019 में 3.89 मिलियन टन था, जो इस साल बढ़कर 4.85 मिलियन टन तक पहुंच गया है.
कंपनी का प्रदर्शन एक नजर में :
टाटा स्टील समूह यानी टाटा स्टील भारत से लेकर विदेशों तक की पूरी कंपनी का प्रदर्शन :
आइटम—2019-2020 का तीसरा तिमाही –2018-2019 का तीसरा तिमाही (अप्रैल से दिसंबर 2018 तक)
उत्पादन————6.99 मिलियन टन—————–6.71 मिलियन टन
डिलीवरी————7.31 मिलियन टन—————–6.47 मिलियन टन
टर्नओवर————35520 करोड़ रुपये—————-38854 करोड़ रुपये
टैक्स भुगतान के पूर्व का मुनाफा—–3659 करोड़ रुपये————-6726 करोड़ रुपये
टैक्स भुगतान के बाद का मुनाफा—-1229 करोड़ रुपये का घाटा—1753 करोड़ रुपये का मुनाफा
टाटा स्टील भारत का प्रदर्शन :
आइटम—2019-2020 का तीसरा तिमाही –2018-2019 का तीसरा तिमाही (अप्रैल से दिसंबर 2018 तक)
उत्पादन————4.47 मिलियन टन—————–4.38 मिलियन टन
डिलीवरी————4.85 मिलियन टन—————–3.89 मिलियन टन
टर्नओवर————21299 करोड़ रुपये—————-22323 करोड़ रुपये
टैक्स भुगतान के पूर्व का मुनाफा—–4111 करोड़ रुपये————-5604 करोड़ रुपये
टैक्स भुगतान के बाद का मुनाफा-——–1194 करोड़ रुपये का घाटा———–2253 करोड़ रुपये
टाटा स्टील की नजर में क्या है इस घाटे की बड़ी वजह
- अमेरिका और चीन के बीच छिड़े ट्रेड वार इसके पीछे बड़ी वजह है, जिससे स्टील का डिमांड काफी घटा है. वैसे चीन का भी एक्सपोर्ट पांच मिलियन टन एक माह में कम हुआ है.
- यूरोपीय बाजार में आया मंदी भी इसकी बड़ी वजह है, जिसके तहत रॉ मैटेरियल की कीमतों में भी बढ़ोत्तरी हो चुकी है और हाट रोल्ड कोयल की कीमत भी घटी है.
- भारतीय अर्थव्यवस्था में भी गिरावट इसकी बड़ी वजह सामने आयी है.

क्या कहते है टाटा स्टील के एमडी सह सीइओ टीवी नरेंद्रन :
”टाटा स्टील ने भारतीय कमजोर अर्थव्यवस्था के बावजूद बेहतर काम किया है और अपना ग्रोथ को बरकरार रखने में कामयाबी हासिल की है. भारत में टाटा स्टील का जो बिजनेस मॉडल है, उस कारण स्लोडाउन होने के बावजूद नये बाजार को विस्तार देने में टाटा स्टील ने कामयाबी पायी है. इसके अलावा ऑटो इंडस्ट्री कठिन दौर से गुजरी है, लेकिन फिर भी सेल्स में किसी तरह की कमी नहीं आयी है. इसके अलावा टाटा स्टील के भूषण स्टील और टाटा स्टील लांड प्रोडक्ट (उषा मार्टिन) के उत्पादन और काम में बेहतर रिकॉर्ड किया जा रहा है. वैसे यूरोप में जरूर घाटा हो रहा है और स्लोडाउन के कारण वहां सबसे ज्यादा संकट की स्थिति उत्पन्न हुई है. टाटा स्टील का कलिंगानगर का प्लांट भी बेहतर काम कर रहा है और उसके विस्तार पर काम चल रहा है और कोल्ड रोलिंग मिल वित्तीय वर्ष 2021 तक जरूर शुरुू हो जायेगा. उन्होंने यह भी जानकारी दी है कि टाटा स्टील को क्रोम के ओर ब्लॉक हासिल करने में मिली सफलता के कारण भी अच्छी स्थिति हुई है. वैसे उन्होंने उम्मीद जतायी है कि आने वाले दिनों में भारत की अर्थव्यवस्था वापस से पटरी पर आ जायेगी और हालात में सुधार हो जायेगा.







