मुंबई/जमशेदपुर : टाटा समूह के एमिरट्स चेयरमैन रतन टाटा देश के कई स्टार्टअप कंपनियों की मदद करते आये है. मोबाइल से लोगों तक डीजल और अन्य सुविधा पहुंचाने वाली पुणे की स्टार्टअप कंपनी रेपोस एनर्जी में भी रतन टाटा ने निवेश किया है. यह कंपनी आर्गेनिक कचड़े से चलने वाला एक मोबाइल इलेक्ट्रिक चार्जिंग वेहिकल लांच किया है. कंपनी के संस्थापक आदिवति भोंसले वालुंज का कहना है कि रतन टाटा के एक फोन कॉल ने उनकी किस्मत ही बदल दी. आदिति भोंसले वालुंज और चेतन वालुंज ने रेपोस एनर्जी की शुरुआत कुछ साल पहले की थी. वह रतन टाटा जैसे व्यक्ति की मदद चाहती थी. लेकिन लोगों ने कहा कि रतन टाटा पर आइडियम मत लगाइये मिलना भी मुश्किल हो जायेगा. लेकिन वह हार नहीं मानी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म लिंकडइन पर अपना प्रोजेक्ट लिखा और 3 डी प्रेजेंटेशन तैयार किया. इसके बाद एक पत्र के माध्यम से रतन टाटा को जानकारी दी और प्रेजेंटेशन भी भेजा. लेकिन कोई जवाब नहीं आया. इसके बाद वे लोग मुंबई जाकर रतन टाटा से मिलने का फैसला लिया. वे लोग रतन टाटा के घर पहुंच गये. करीब 12 घंटा के इंतजार के बाद भी रतन टाटा से उनकी मुलाकात नहीं हो पायी. आदिति अभी वापस मुंबई के एक होटल में हतोत्साहित होकर वापस आ गयी. इसके बाद आदिति का फोन बजा. दूसरी तरफ से आवाज आयी कि हेलो क्या मैं आदिति से बात कर सकता हूं. इस पर आदिति ने पूछा कि आप कौन बोल रहे हैं, तो सामने से आवाज आयी, मैं रतन टाटा बोल रहा हूं, मुझे तुम्हारा लेटर मिला, क्या हम मिल सकते है. इसके बाद आदिति को अपने कानों पर भरोसा नहीं हुआ. उसको विश्वास ही नहीं हुआ कि रतन टाटा से वह बात कर रही है. इसके बाद आदिति और चेतन टाटा समूह के एमिरटस चेयरमैन से मिले और अपना पूरा प्लान बताया. करीब तीन घंटे तक मीटिंग चली. इसके बाद रतन टाटा ने 2019 में उनकी कंपनी में निवेश किया और फिर 2022 में फिर से उनकी कंपनी में निवेश कर दिया.





