
जमशेदपुर : झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के हालिया आदेश के बाद पूर्वी सिंहभूम के स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. विभाग की विशेष सचिव नेहा अरोड़ा को पूर्वी सिंहभूम समेत चार जिलों के मेडिकल कॉलेजों और सदर अस्पतालों की मासिक निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसके बाद जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों ने संभावित निरीक्षण को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं. 24 जुलाई को जारी आदेश के अनुसार, विशेष सचिव हर महीने संबंधित जिलों का दौरा कर मेडिकल कॉलेजों और सदर अस्पतालों में संचालित योजनाओं की समीक्षा करेंगी. निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री अस्पताल संचालन एवं रखरखाव योजना, मुख्यमंत्री अस्पताल कायाकल्प योजना, अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना, डायलिसिस सेवा, पीएम-एबीएचआईएम, 15वें वित्त आयोग की योजनाएं, क्रिटिकल केयर हेल्थ ब्लॉक, सदर अस्पतालों में ऑपरेशन सेवाओं की शुरुआत, चलंत ग्राम क्लीनिक, मदर टेरेसा एडवांस हेल्थ क्लीनिक और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन का आकलन किया जाएगा. निरीक्षण के बाद योजनाओं में पाई जाने वाली कमियों की पहचान कर सुधारात्मक सुझावों के साथ विस्तृत रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंपी जाएगी. आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है. विभागीय सूत्रों के अनुसार, संभावित दौरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी रिकॉर्ड, योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों को अपडेट करने में जुट गए हैं. माना जा रहा है कि विशेष सचिव का पूर्वी सिंहभूम दौरा जल्द हो सकता है. नेहा अरोड़ा का पूर्वी सिंहभूम से पुराना प्रशासनिक जुड़ाव रहा है. वर्ष 2017 में प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी रहते हुए उन्होंने चर्चित पटमदा-बोड़ाम पौधरोपण घोटाले की जांच की थी. आरटीआई कार्यकर्ता दिनेश महतो की शिकायत पर तत्कालीन लोकायुक्त के निर्देश के बाद उन्हें जांच की जिम्मेदारी दी गई थी. ( नीचे देखें पूरी खबर)
जांच में सामने आया था कि कागजों पर 150 एकड़ में पौधरोपण दिखाकर करीब 60 लाख रुपये की सरकारी राशि खर्च दर्शाई गई, जबकि भौतिक सत्यापन में केवल 50 एकड़ क्षेत्र में पौधरोपण मिला और वहां भी बेहद कम पौधे पाए गए. उनकी रिपोर्ट के आधार पर पटमदा थाना में प्राथमिकी दर्ज हुई और कई अधिकारियों व संबंधित संस्था के खिलाफ कार्रवाई की गई. बाद में संस्था को ब्लैकलिस्ट किया गया तथा कई अधिकारियों को जेल भी जाना पड़ा. इसी निष्पक्ष और सख्त कार्यशैली के कारण अब स्वास्थ्य विभाग की मासिक निगरानी की जिम्मेदारी मिलने के बाद पूर्वी सिंहभूम में प्रशासनिक सक्रियता बढ़ गई है. माना जा रहा है कि नियमित निरीक्षण से अस्पतालों की कार्यप्रणाली, योजनाओं के क्रियान्वयन और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में ठोस पहल देखने को मिल सकती है.







