जमशेदपुर : टाटा स्टील में कर्मचारियों को इस साल 20 फीसदी बोनस के साथ 20 हजार रुपये बोनस मिल रहा है. यह इतना आसान नहीं था बोनस समझौता करना. इसके लिए टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु, महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह ने काफी मेहनत की है और मैनेजमेंट के पास अपनी तार्किक बातों को रखा, जिसके बाद यह ऐतिहासिक समझौता हो पाया है. टाटा स्टील मैनेजमेंट पहले तो यह तैयार नहीं थी कि पहले के बोनस समझौता को ही आधार बनाकर समझौता किया जाये. लेकिन यूनियन ने कहा कि पहले का फार्मूला ही ठीक है क्योंकि, वह प्रोफिट, प्रोडक्टिविटी, सेफ्टी और प्रोफिटेबिलिटी के आधार पर है. इस कारण उसको ही रखा जाना चाहिए. (नीचे भी पढ़ें) इसे भी देखें : टाटा स्टील में ऐतिहासिक बोनस समझौता हुआ, टाटा स्टील के कर्मचारियों को बोनस दिलाना कितना मुश्किल हुआ, कैसे और क्या लाभ होगा, जानिये टाटा वर्कर्स यूनियन के टॉप थ्री पदाधिकारियों की जुबानी, टाटा स्टील के बोनस को लेकर honeydew-opossum-969929.hostingersite.com/ की संवाददाता अन्नी अमृता ने विस्तार से अध्यक्ष टुन्नु, महामंत्री सतीश और डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश से की बात, देखिये-video-news-youtube पर देखिये-video
इसके बाद जब उसके आधार पर गणना की गयी तो राशि बढ़कर 20 फीसदी से ज्यादा आ गया. चूंकि, सरकार का भी सीलिंग है और यूनियन का भी एक समझौता है कि किसी भी हाल में बोनस की राशि 20 फीसदी से अधिक नहीं होगी, इस कारण इसको 20 फीसदी पर ही रोक दिया गया. बाद में यूनियन ने दलील दी कि ऐसा क्या बात है. जब मुनाफा ज्यादा हुआ, डिविडेंड शेयरधारकों को जब बेहतर मिला तो फिर कर्मचारियों को 20 फीसदी की सीलिंग पर क्यों मिलना चाहिए. इसके बाद टाटा स्टील मैनेजमेंट राजी हुई और मानी कि अतिरिक्त पैसा देना चाहिए, जिसके बाद कर्मचारियों को 20 फीसदी बोनस यानी कुल 317.51 करोड़ रुपये और उसके अतिरिक्त 20 हजार रुपये यानी कुल 23710 कर्मचारियों के बीच अतिरिक्त 47 करोड़ 42 लाख रुपये दिया जायेगा यानी कुल राशि 364 करोड़ृ 93 लाख रुपये दिया जायेगा. इसी तरह जमशेदपुर में 12213 कर्मचारियों के बीच 188.54 करोड़ रुपये और 20 हजार रुपये को जोड़कर 24 करोड़ 42 लाख रुपये और दिया जायेगा यानी कर्मचारियों को जमशेदपुर में 212.96 करोड़ रुपये दिया जायेगा. (नीचे भी पढ़ें)
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इस साल 20 हजार रुपये मिला, आने वाले साल में भी ऐसा मिलेगा, यह संभावना कम
टाटा स्टील में इस साल बेहतर प्रोफिट होने के कारण बेहतर बोनस समझौता हुआ है. 20 फीसदी बोनस मिलने वाला है जबकि अतिरिक्त 20 हजार रुपये बोनस मिल रहा है. लेकिन यह आने वाले सालों में भी मिलेगा या नहीं, यह तय नहीं है. अगर प्रोफिट इससे कम रहा तो हो सकता है कि मैनेजमेंट ना दें या यूनियन मांगने की स्थिति में नहीं रहे. सारा चीज प्रोफिट पर ही रहेगा. वैसे भी बोनस को प्रोफिट शेयरिंग बोनस ही कहा जाता है. (नीचे भी पढ़ें)
आने वाले सालों में भी होता रहेगा बेहतर बोनस
टाटा वर्कर्स यूनियन के प्रयास के बाद टाटा स्टील के कर्मचारियों का ऐतिहासिक बोनस हुआ है. इसके साथ ही फार्मूला भी पुराना ही तय कर दिया गया है. समझौता के तहत पुराने बोनस फार्मूला को वर्ष 2023-2024 तक के लिए बढ़ा दिया गया है, जिसके तहत प्रोफिट का 1.5 फीसदी, प्रोफिटेबिलिटी पर प्रोफिट प्रति टन सेलेबल स्टील, प्रोडक्टिविटी प्रति टन क्रूड स्टील का एक व्यक्ति प्रति वर्ष उत्पादन करना और सेफ्टी यानी एलटीआइआर के आधार पर वर्ष 2024 तक का समझौता होगा. पुराना फार्मूला लागू होने से कर्मचारियों को आने वाले सालों तक बेहतर बोनस मिलेगा क्योंकि स्टील के उत्पादन और कंपनियों से जुड़े लोगों का मानना है कि स्टील उद्योगों के बाजार में आने वाले तीन सालों तक तेजी ही रहेगी. (नीचे भी पढ़ें)
टाटा वर्कर्स यूनियन अध्यक्ष और अन्य के विरोधी पस्त
टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु और महामंत्री सतीश सिंह लगभग एक खेमे के माने जाते रहे है. सत्ता पक्ष होने के कारण उनके खिलाफ विपक्ष लामबंदी करती आयी है. लेकिन बोनस समझौता और भविष्य के भी बेहतर समझौता से विरोधी पस्त हो चुके है. जाहिर सी बात है कि इसको लेकर विपक्ष अब नया दावं खोजने में लगी होगी. (नीचे भी पढ़ें)
बोनस पर प्रतिक्रिया :
”यह बोनस काफी बेहतर रहा है. हमने अपनी तरफ से मेहनत किया. पूरी टीम ने मेहनत की है. महामंत्री और डिप्टी प्रेसिडेंट का पूरा साथ मिला, जिस कारण अब तक का सबसे बेस्ट बोनस करा पाया.” – संजीव चौधरी टुन्नु, अध्यक्ष, टाटा वर्कर्स यूनियन (नीचे भी पढ़ें)
”कंपनी को इस बार ज्यादा लाभ हुआ है और कंपनी जिस तरह से हमेशा अपने सारे स्टेक होल्डर को ध्यान रखती है उसी तरह उन सभी कर्मचारियों का दिए हुए उनके योगदान का भी उचित बोनस की राशि यूनियन के आग्रह पर सहमति जताई. इसके लिए टाटा स्टील के एमडी और शीर्ष अधिकारियों को यूनियन की तरफ से धन्यवाद और कर्मचारियों को ढेर सारी शुभकामनाएं. निश्चित तौर पर यह राशि कर्मचारियों के भविष्य को सुनिश्चित करने में काम आएगी.” –सतीश सिंह, महामंत्री, टाटा वर्कर्स यूनियन (नीचे भी पढ़ें)
”टाटा स्टील ने बेहतर प्रोफिट किया. इस कराण बेहतर बोनस दिला पाये है. आगे के लिए भी हम लोगों ने फार्मूला तय किया है. इससे लाभ होगा. अध्यक्ष और पूरी टीम ने मिलकर मेहनत की है. कर्मचारी अपने पैसे का सदुपयोग करें. –शैलेश सिंह, डिप्टी प्रेसिडेंट, टाटा वर्कर्स यूनियन (नीचे भी पढ़ें)

”तमाम कर्मचारियों को बधाई. बोनस के इस अच्छी राशि को अपने परिवार और बच्चों के भविष्य के लिए इस्तेमाल करें और हमारे टाटा वर्कर्स यूनियन के टॉप 3 को तहे दिल से धन्यवाद. आज इनकी एकता ही इतना शानदार बोनस दिलाने में काम आई.”–नितेश राज, सहायक सचिव, टाटा वर्कर्स यूनियन (नीचे भी पढ़ें)

”इस वर्ष यूनियन के शीर्ष नेतृत्व ने बेहतरीन बोनस समझौता किया. शानदार बोनस समझौता कर्मचारियों के अथक परिश्रम का प्रतिफल है. अब तक के सबसे बेहतर बोनस के लिए यूनियन एवं प्रबंधन के शीर्ष नेतृत्व को हार्दिक बधाई. –संतोष पाण्डेय, पूर्व कमिटी मेंबर, सिंटर प्लांट (नीचे भी पढ़ें)

”इस वर्ष का बोनस कर्मचारियों के अपेक्षा के अनुरुप ही बेहतर हुआ है,अपने क्षेत्र के कर्मचारियों, विशेष कर न्यू सीरीज के बच्चे एवम बच्चियों के चेहरे पर खुशी देख कर वास्तव में मन प्रसन्न हो गया, और टाटा वर्कर्स यूनियन का सदस्य होने का गौरव सा अनुभव महसूस हो रहा है. इसके लिए हमारे टॉप थ्री, सभी पदाधिकारियों एवं प्रबंधन के अधिकारियों को दिल के अंतर्मन से धन्यवाद एवं आभार. –प्रमोद सिंह, कमेटी मेंबर, सिन्टर प्लांट (नीचे भी पढ़ें)

टाटा स्टील में वर्ष 2021-22 का वार्षिक बोनसअब तक का सबसे सर्वश्रेष्ठ और ऐतिहासिक बोनस समझौता साबित हुआ है। आने वाले समय में हमारे सहयोगी कर्मचारी इस समझौते को 20-20 के नाम से याद रखेंगे, क्योंकि बोनस को लेकर एक्ट में लगाए गए अधिकतम सीलिंग से ज्यादा ₹20000 गुडविल अमाउंट के रूप में हम कर्मियों को प्राप्त हुआ है। यह निसंदेह काबिले तारीफ है और टाटा वर्कर्स यूनियन की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही है. सरोज कुमार सिंह, सहायक सचिव, टाटा वर्कर्स यूनियन. (नीचे भी पढ़ें)

हम कर्मचारियों की मेहनत और प्रबन्धन का कुशल नेतृत्व के कारण कंपनी को बेहतर मुनाफा हुआ। 20% से ज्यादा बोनस के समझौते मे हस्ताछर करना गर्व की बात है। हम श्री टुन्नू चौधरी के नेतृत्व मे कंपनी और मजदूर वर्ग के बेहतरी की लिए सदैव प्रयास करते रहेंगे। संजय सिंह, उपाध्यक्ष, टाटा वर्कर्स यूनियन. (नीचे भी पढ़ें)
पिछले साल के अनुपात में कहां है इस साल का बोनस समझौता
कर्मचारियों के आइटम——पिछले साल———–इस साल
कुल कर्मचारियों की संख्या–23710————22002
कुल कर्मचारी जमशेदपुर में—12558—————12213
कुल बोनस की राशि———270.28 करोड़ रुपये—-317.51 करोड़ रुपये 47 करोड़ 42 लाख अतिरिक्त यानी कुल 364 करोड़ 93 लाख
जमशेदपुर में बोनस की राशि बंटेगी-158.31 करोड़—-188.64 करोड़ रुपये और 20 हजार रुपये जोड़कर 24 करोड़ 42 लाख अतिरिक्त यानी कुल 212.96 करोड़ रुपये
अधिकतम बोनस की राशि——-3,59,029 रुपये—–4,58,411 रुपये और 20 हजार रुपये
एनएस ग्रेड का अधिकतम बोनस—92,910 रुपये——-1,19,527 रुपये और 20 हजार रुपये
अधिकतम बोनस पूरा अटेंडेंस वाले एनएस ग्रेड को-34,290 रुपये–41,448 रुपये और 20 हजार रुपये
अध्यक्ष से ज्यादा बोनस कई अन्य पदाधिकारी को
टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष पद पर आसीन संजीव चौधरी टुन्नु से ज्यादा कई पदाधिकारी को बोनस मिलने वाला है. इसको लेकर सबकी निगाहें टिकी हुई है.
संजीव चौधरी टुन्नु, अध्यक्ष-2 लाख 95 हजार रुपये
सतीश सिंह, महासचिव-2 लाख 81 हजार रुपये
शैलेश सिंह, डिप्टी प्रेसिडेंट-2 लाख 99 हजार रुपये
शहनवाज आलम, उपाध्यक्ष-3 लाख 8 हजार रुपये
संजय सिंह, उपाध्यक्ष-2 लाख 32 हजार रुपये
शत्रुघ्न राय, उपाध्यक्ष-3 लाख 23 हजार रुपये से अधिक
संजीव तिवारी, उपाध्यक्ष-1 लाख 13 हजार 833 रुपये (एनएस ग्रेड)
नितेश राज, सहायक सचिव-2 लाख 57 हजार रुपये
सरोज सिंह, सहायक सचिव-2 लाख 88 हजार
अजय चौधरी, सहायक सचिव-2 लाख 45 हजार
हरिशंकर सिंह, कोषाध्यक्ष-3 लाख 37 हजार रुपये
किस वर्ष, कितना मिला बोनस :
वर्ष—–कंपनी का मुनाफा—बोनस की राशि—बोनस का प्रतिशत (नीचे पूरी खबर पढ़ें)
1991-160.13 करोड़ रुपये-38.6 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1992-214.16 करोड़ रुपये-44.54 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1993-127.12 करोड़ रुपये-50.75 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1994-180.84 करोड़ रुपये-54 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1995-281.12 करोड़ रुपये-66.04 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1996-465.79 करोड़ रुपये-76.46 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1997-469.21 करोड़ रुपये-75.86 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1998-322.08 करोड़ रुपये-72.83 करोड़ रुपये-17.50 फीसदी
1999-282.23 करोड़ रुपये-69.61 करोड़ रुपये-16 फीसदी
2000-422.59 करोड़ रुपये-75.55 करोड़ रुपये-18 फीसदी
2001-553.44 करोड़ रुपये-83 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2002-204.90 करोड़ रुपये-78 करोड़ रुपये-15 फीसदी
2003-1012.31 करोड़ रुपये-102.07 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2004-1746.22 करोड़ रुपये-102 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2005-3474.16 करोड़ रुपये-98.1 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2006-3506.38 करोड़ रुपये-102.01 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2007-4222.15 करोड़ रुपये-107 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2008-4687.03 करोड़ रुपये-113 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2009-5201.74 करोड़ रुपये-139 करोड़ रुपये-18.50 फीसदी
2010-5046.80 करोड़ रुपये-143 करोड़ रुपये-17.50 फीसदी
2011-6217.69 करोड़ रुपये-171 करोड़ रुपये-18.50 फीसदी
2012-6184 करोड़ रुपये-182.47 करोड़ रुपये-17.69 फीसदी
2013-5050.64 करोड़ रुपये-180.50 करोड़ रुपये-16.01 फीसदी
2014-6553.95 करोड़ रुपये-193.34 करोड़ रुपये-15.46 फीसदी
2015-6500 करोड़ रुपये-154.72 करोड़ रुपये-8.53 फीसदी
2016-4900 करोड़ रुपये-130 करोड़ रुपये-8.60 फीसदी
2017-3933.17 करोड़ रुपये-164 करोड़ रुपये-11.27 फीसदी
2018-6682.49 करोड़ रुपये-203.24 करोड़ रुपये-12.54 फीसदी
2019-6323 करोड़ रुपये-239.61 करोड़ रुपये-15.86 फीसदी
2020-7935.89 करोड़ रुपये-235.54 करोड़ रुपये-12.9 फीसदी
2021-9752.13 करोड़ रुपये-270.28 करोड़ रुपये-16 फीसदी





