
रोहित कुमार
जमशेदपुर : शहर में आये दिन साइबर ठगी के मामले में बढ़ते ही जा रहे हैं. हालांकि पिछले ही दिनों जमशेदपुर की साइबर पुलिस ने साइबर क्राइम करने वाले गिरोह का भंड़ाफोड़ किया था. इसके बावजूद अपराध में कमी नहीं नजर आ रही है. आये दिन एक न एक पीड़ित साइबर थाने में ओएलएक्स से जुड़ा मामला लेकर शिकायत के लिए पहुंच रहा है. साइबर थाना प्रभारी उपेंद्र मंडल का कहना है कि जब तक शहर के लोग साइबर अपराध के प्रति जागरुक नहीं होंगे तब तक इस साइबर अपराध की दुनिया को खत्म नहीं किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि साइबर अपराधी आर्मी का अधिकारी बनकर लोगों को अपने विश्वास में लेकर खुद आर्मी का अफसर होने का दावा करते हैं, जिससे लोग उनके झांसे में आकर फंस जाते हैं.
हर दिन आ रहा है औसतन एक मामला
साइबर थाना में सिर्फ जनवरी माह में ही 38 मामले ऐसे आये हैं जिनमें लोगो को ओएलएक्स में सामान बेचने या खरीदने की बात कहकर ठगा गया था.
ऐसे देते हैं घटना को अंजाम
कोई भी व्यक्ति जो ओएलएक्स पर सामान बेचने के या खरीदने के लिए विज्ञापन डालता है, उससे अपराधी आर्मी का अधिकारी बनकर संपर्क करते हैं. उसके बाद वह संबंधित व्यक्ति को फोन पर यह विश्वास दिलाता है कि वह एक आर्मी का जवान है. वर्तमान में कहीं और पदस्थापित है. सामान लेने के लिए उसका एक साथी आ जाएगा. फिर वह तत्काल ऑनलाइन पेमेंट की बात कहता है. यहां से शुरू होता है असली खेल. अपराधी पीड़ित को एक लिंक भेजता है. यह लिंक पेमेंट सेंट की जगह पेमेंट रिक्वेस्ट का होता है, जिसमें साफ तौर पर अंग्रजी भाषा मे लिखा होता है. यहां मैसेज को न पढ़कर व्यक्ति उस लिंक को क्लिक कर देता है. क्लिक करते ही उसके खाते से उतने रुपये कट जाते हैं. इसके बाद अपराधी गलती होने की बात कहते हुए फिर से लिंक भेजता है. ऐसा करते हुए वह घटना को अंजाम देता है.
ऐसे बचें साइबर ठगी से
साइबर ठगी से पुलिस आपको नहीं बचा सकती. इसके लिए आपको खुद को जागरूक करना होगा. अगर आप ऑनलाइन भुगतान प्राप्त कर रहे हैं, तो मोबाइल पर आये हुए मैसेज को पढ़कर ही उस पर क्लिक करें. वहीं आप किसी से सामान की खरीदारी कर रहे हैं तो बेचने वाले व्यकित से मिलकर ही सामान खरीदें. ओएलएक्स भी अपनी वेबसाइट पर लोगों को यही सलाह देता है.







