कवि कुमार (जमशेदपुर के वरिष्ठ पत्रकार है, जो आजाद न्यूज से जुड़े है)
जमशेदपुर, 12 जुलाई : अब तक गोवंश की तस्करी छोटा हाथी, 407 ट्रक, कार और कभी कभार 10 चक्का ट्रक से होने की बातें सामने आई हैं, परंतु पहली बार वध करने हेतु गोवंश की तस्करी हाईवा से बड़े पैमाने पर की गई. अक्सर हाईवा बड़े औद्योगिक घराने द्वारा रात भर चलाए जाते हैं. हाईवा में स्लैग या बिल्डिंग मैटेरियल ढोए जाते हैं इसलिए इसकी चेकिंग भी सड़क पर नहीं की जाती. गोवंश तस्करों ने इसी का फायदा उठाया तथा खुलेआम गोवंश को एक शहर से दूसरे शहर में पहुंचाने के लिए आधी रात के बाद हाईवा का इस्तेमाल किया. हाईवा में एक साथ ज्यादा की संख्या में गोवंश ठूंसकर भरे गए, जिससे कसाइयों की लागत कम हुई. हाईवा से गोवंश की सप्लाई का रहस्य पर्दे के पीछे ही रह जाता अगर आदित्यपुर मुख्य सड़क पर दो गायें चलती हाईवा से सड़क पर गिरकर गंभीर घायल नहीं हुई होतीं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस घटना के बाद भी पुलिस में हाईवा को खोजने के लिए सीसीटीवी खंगालने की कोशिश नहीं की. इससे पता चलता है कि कसाई से पुलिस की मिलीभगत बड़े स्तर पर है. (नीचे देखे पूरी खबर)

सरायकेला की ओर से बिष्टुपुर जाने के लिए 6 जुलाई को एक हाईवा द्वारा कई थाना क्षेत्रों को पार कर आदित्यपुर पहुंचना. उसमें से दो गायों का बीच सड़क पर गिर जाना. फौरन आदित्यपुर थाना जाकर प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा खबर करना. इसके बाद भी पुलिस द्वारा कई दिन बीत जाने के बाद भी हाईवा का पता नहीं लगाना, इसका सबूत है. सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि इस रास्ते से बड़े वाहनों का परिचालन जिला प्रशासन ने बंद कर रखा है. इसके लिए कदमा से आदित्यपुर टोल ब्रिज के पास तथा जमशेदपुर की ओर खरकाई ब्रिज पर कड़ी चेकिंग होती है. तब एक हाईवा ट्रैफिक नियम तोड़ते हुए किस तरह दोनों पुलिस चौकियों को पार कर जमशेदपुर में घुस गई ? यह अलग ही जांच का विषय है. गायों के गिरने के बारे में आदित्यपुर थाना के पुलिस अधिकारी बिष्टुपुर, जुगसलाई, साकची, मानगो थानों को खबर कर आसानी से हाईवा को पकड़ कर गोवंश की जान बचा सकते थे परंतु थाना ने किस कारण वश सक्रियता नहीं दिखाई. यह गहन जांच का विषय है. अब बात करते हैं बीच सड़क पर हाईवा से गिरी हुई घायल दो गायों की. इन गायों को दूसरे वाहनों से कुचलने से बचाने, इनका इलाज कराने और इन्हें गौशाला पहुंचाने की बात को लेकर कुछ जागरुक लोगों को सड़क जाम करना पड़ा. वरना आदित्यपुर पुलिस ने इन घायल गायों को टैंपो में लाकर फुटबॉल ग्राउंड में डाल कर पल्ला झाड़ लिया था. पूरी घटना इस तरह बताई जाती है. (नीचे देखे पूरी खबर)

6 जुलाई को तड़के 3:50 बजे हाईवा से आदित्यपुर साईं नर्सिंग होम और सिटी पैलेस के पास बीच रोड पर दो गायें गिरीं. कुछ देर बाद वहां से गुजरने वाले एक न्यूज़ के रिपोर्टर राहुल कुमार एवं शांतनु चटर्जी नामक दो युवक में सड़क पर गायों को तड़पते हुए देखा. कुछ राहगीरों की मदद से ये दोनों युवक गायों को दोनों तरफ से घेरकर खड़े हो गए, जिससे कोई अन्य वाहन उन्हें धक्का न मार दे. शांतनु फौरन आदित्यपुर थाना गए और उन्होंने पूरी घटना पुलिस को बताई. लोगों ने 100 नंबर पर डायल भी किया वहां से कहा गया कि 100 नंबर के बाद 9 नंबर दबाएं. 9 नंबर दबाते ही फोन कट जाता था. ऐसा कई बार हुआ. गायों और लोगों के चलते एक तरह से सड़क जाम हो गई. तब करीब 6 बजे सुबह आदित्यपुर पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने दो टैंपो में गायों को उठाया और फुटबॉल ग्राउंड में रख दिया. इस बीच सरकारी पशु चिकित्सक आए. उनके पास दर्द का इंजेक्शन भी नहीं था. उन्होंने युवकों को इंजेक्शन लिखकर दिया परंतु कोई भी मेडिकल दुकान नहीं खुली थी. युवकों ने पुलिस से कहा कि किसी तरह इंजेक्शन का इंतजाम करें परंतु पुलिस खड़ी रही. इसके बाद घायल गायों को फुटबॉल ग्राउंड में छोड़कर पुलिस और लोग चले गए. खून से लथपथ दोनों गाय घंटों तड़पती रहीं. फुटबॉल ग्राउंड में सुबह 9 बजे के करीब खेलने आए युवकों ने गायों की स्थिति देखी तो उन्होंने सड़क जाम कर दी. सड़क जाम होने के बाद पुलिस भागी-भागी घटनास्थल पर पहुंची तथा घायल गायों को उठाकर कलियाडीह गौशाला पहुंचाया. कसाइयों ने तो अपना काम किया ही पुलिस ने भी 6 घंटे तक घायल गायों को तड़पा कर कसाइयों से कम बड़ा काम नहीं किया.







