डिमना में किन्नर की हत्या मामले में प्रेमी को उम्रकैद, अलग-अलग धारा के तहत 55 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया
जमशेदपुर के ग्रामीण इलाका बोड़ाम थाना क्षेत्र में 26 अप्रैल 2015 को हुई लक्खी किन्नर हत्याकांड में एडीजे-वन कुमार दिनेश की अदालत ने आरोपी प्रेमी उत्तम साहू को बुधवार को उम्रकैद और 55 हजार रूपए का जुर्माना का सजा सुनाई हैं. अदालत ने गत गुरुवार को आरोपी उत्तम साहू को दोषी करार दिया था. अपर लोक अभियोजक राजीव कुमार ने बताया कि इस मामले में अदालत के समक्ष कुल 13 लोगों की गवाही कोर्ट में हुई है. अदालत ने आरोपी उत्तम साहू को भादवि की धारा 302 (हत्या) में उम्रकैद 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया हैं, जुर्माना नहीं देने पर सजा एक साल के लिए बढ़ाई गई हैं जबकि धारा 201 ( साक्ष्य छूपाने) में तीन साल 5 हजार रुपए की जुर्माना लगाया गया, जुर्माना नहीं देने पर तीन माह की और अतिरिक्त सजा दी गई. दोनों सजांए साथ-साथ चलेगी.
26 जून की रात 11 बजे से था लापता
भालुबासा का रहने वाला कृष्णाकार मुखी उर्फ लक्खी 26 अप्रैल की रात के 11 बजे से घर से लापता था. इसके पहले रात को उसके मोबाइल पर प्रेमी उत्तम का फोन आया था. फोन आने के बाद उसने पिता सुचित्रो मुखी को बताया कि उत्तम का फोन आया था. अभी जाना होगा. इसके बाद वह घर से निकल गया. 27 जून को भी जब लक्खी घर पर नहीं लौटा तब परिवार के लोग परेशान होकर उसकी खोजबीन करने लगे. इसके बाद घटना की शिकायत सीतारामडेरा थाना में 27 अप्रैल को लक्खी की पिता सुचित्रो मुखी गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाई थी. 30 अप्रैल को परिवार के लोगों को पता चला कि बोड़ाम अलकतरा फैक्ट्री के पास से एक शव बरामद हुआ है जो लक्खी का हो सकता हैं. इसके बाद परिवार के लोगों ने पोस्टमार्टम हाउस में जाकर शव की पहचान की थी. 29 अप्रैल को लक्खी का शव डिमना पटमदा मोड़ के पास 35 फीट खाई से बरामद किया गया था. घटना के दिन एएसआइ राम जगन पासवान ड्यूटी पर थे. उन्होंने जानकारी मिली थी कि कोई शव खाई में पड़ा हुआ है. इसके बाद शव को बाहर निकाला गया था. शव पर जगह-जगह पर चाकू से हमला किए जाने से उनकी शरीर पर जख्म के निशान थे. पुलिस ने जांच में पाया था कि साक्ष्य को छिपाने के लिये उततम साहु ने शव को खाई में फेंक दिया था.
बड़शोल में नाबालिग के साथ अश्लील हरकत करने के आरोपी मानुष मुड़िया आश्रम निगमानंद के साधु साक्ष्य अभाव में बरी
बड़शोल थाना क्षेत्र के मानुष मुड़िया आश्रम निगमानंद के एक 75 वर्षीय साधु के द्वारा 11 साल के नाबालिग के साथ अश्लील हरकत करने के आरोप से अदालत ने बुधवार को साधु गुरुचरण चैतन्य ब्रम्हचारी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया. इस मामले में पीड़िता समेत पांच लोगों की गवाही हुई थी. पीड़िता ने अभियोजन का समर्थन नहीं किया था. मामले की सुनवाई विशेष अदालत पोस्को सह एडीजे पांच संजय कुमार उपाध्याय की अदालत कर रही थी. घटना 28 दिसंबर 2019 की सुबह 9 बजे की हैं. घटना के दिन पीड़िता मानुष मुड़िया आश्रम निगमानंद में मेला घूमने के लिए गयीं थी. तभी आश्रम के सन्यासी (साधु) ने उसे मूर्ति में कपड़ा पहनाने की बात बोलकर बुलाया. जैसे ही वह अन्दर गई साधु ने दरवाजा बंद कर उसके साथ अश्लील हरकत करने लगा. तब पीड़िता ने शेर मचाई और रोने लगी देखकर सन्यासी वहा से भाग गया. अन्य सन्यासी वहा पहुंचा और पीड़िता से रोने की बजह पूछा लेकिन वह कुछ नहीं बताया. पीड़िता घर पहुंची और सारी घटना की आपबीती अपनी मां से बनाई. सूचना पर परिजन अन्य ग्रामीण के साथ आश्रम पहुंची, एवं सन्यासी को पकड़ लिए. मारपीट के बाद पुलिस को सौप दिया था. इस संबंध में सीडीपीओ बहरागोड़ा ने लड़की का बयान दर्ज कर बड़शोल थाने में मामला दर्ज करने का आदेश दिया था. आरोपी सन्यासी के खिलाफ बड़शोल थाने में दुष्कर्म के प्रयास, छेड़खानी और पोस्को के तहत मामला दर्ज किया गया था.






