
जमशेदपुर : आदिवासी सेंगेल अभियान, केंद्रीय सरना समिति रांची, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद रांची, के नेता शुक्रवार को झारखंड के जमशेदपुर के कदमा में एक विशेष बैठक किया. बैठक में तय हुआ की हर हाल में नवंबर और दिसंबर 2020 के भीतर सरना धर्म कोड को हासिल करना ही पड़ेगा अन्यथा भारत के लगभग 15 करोड़ आदिवासी मजबूरन दूसरे धर्मों की तरफ पलायन को मजबूर हो सकते हैं. चूंकि, वर्ष 2021 का वर्ष भारत में जनगणना का वर्ष है इसलिए तीनों संगठनों ने बाकी अन्य तमाम आदिवासी संगठनों के साथ मिलकर निर्णायक संघर्ष का फैसला लिया है. अगर भारत सरकार और सभी संबंधित सरकारें 30 नवंबर 2020 तक सरना धर्म कोड का फैसला नहीं देंगे तो पूर्व घोषित 6 दिसंबर 2020 को राष्ट्रव्यापी रेल-रोड चक्का जाम किया जाएगा. तीनों संगठनों के नेताओं ने शुक्रवार को यह तय किया की रविवार, 8 नवंबर 2020 को प्रेस क्लब रांची में दिन के 11 बजे से 1 बजे तक एक विशेष बैठक का आयोजन किया जाएगा, जिसमें झारखंड, बंगाल, बिहार, ओड़िशा, असम के प्रतिनिधि और सरना धर्म समर्थक अन्य नेताओं और संगठनों के प्रतिनिधि को भी आमंत्रित किया जाएगा ताकि निर्णायक सरना धर्म कोड प्राप्ति के आंदोलन में सबके समर्थन और सहयोग प्राप्त हो सके. रविवार, 8 नवंबर 2020 को दिन के 1:00 बजे से रांची प्रेस क्लब में एक पत्रकार सम्मेलन का भी आयोजन होगा. बैठक में केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष फूलचंद तिर्की, संरक्षक भुवनेश्वर लोहरा और सचिव विनय उराव शामिल थे. विकास परिषद के महासचिव सत्यनारायण लकड़ा के अलावे आदिवासी सेंगल अभियान की तरफ से राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू और राष्ट्रीय संयोजक सुमित्रा मुर्मू उपस्थित थे.






