
रांची : राष्ट्रपति चुनाव 18 जुलाई को होने वाली है. इस कड़ी में शुक्रवार को ही राष्ट्रपति पद के लिए कांग्रेस समेत विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा चुनाव प्रचार करने के लिए झारखंड आये. झारखंड में शनिवार को उनका कांग्रेस ऑफिस में भव्य स्वागत किया गया. इस दौरान कांग्रेस के प्रभारी अविनाश पांडे और प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर समेत अन्य लोग शामिल हुए. उनका विधायकों की ओर से अभिनंदन किया गया. इस दौरान उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों के सवालों का भी जवाब दिया. यशवंत सिन्हा ने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए उनके प्रचार अभियान का आखिरी दिन है. उन्होंने कहा कि यह बेहद खुशी है कि वे इसे रांची में संपन्न कर रहे हैं. अविभाजित बिहार उनकी जन्मभूमि थी. झारखंड उनकी कर्मभूमि है. श्री सिन्हा ने कहा कि वे इस राज्य का बहुत ऋणी है क्योंकि झारखंड के लोगों ने उनको तीन बार लोकसभा के लिए चुनकर अपना प्यार, स्नेह और विश्वास दिया है. श्री सिन्हा ने कहा कि नई दिल्ली में नामांकन दाखिल करने के एक दिन बाद वे 28 जून को केरल से अपना प्रचार अभियान शुरू किया था. तब से वे तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, कर्नाटक, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, हरियाणा-पंजाब, असम, मध्य प्रदेश और बिहार की यात्रा की है. शनिवार को मतदान से दो दिन पहले, वे झारखंड में इसे समाप्त कर रहे हैं. संयुक्त विपक्ष के साझा उम्मीदवार के रूप में वे सभी दलों, उनके नेताओं एवं उनके सांसदों और विधायकों के प्रति आभार की भावना से अभिभूत हैं, जिन्होंने उनको अपना समर्थन दिया. (नीचे देखे पूरी खबर)

लोकतंत्र को बचाने के लिए वोट करें
यशवंत सिन्हा ने कहा कि भारत के 15वें राष्ट्रपति का चुनाव बेहद मुश्किल समय में हो रहा है. हमारे गणतंत्र को संविधान के लिए इससे पहले कभी भी एक साथ इतने खतरों का सामना नहीं करना पड़ा. संसदीय लोकतंत्र की व्यवस्था, जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम की सबसे अनमोल देन थी, हर दिन नए खतरों का सामना कर रही है. सत्ताधारी दल को सत्ता पर कब्जा करने एवं अपनी ताकत बढ़ाने के लिए संविधान के मूल्यों, आदर्शों और अवरोधों का उल्लंघन करने में कोई शर्म या संकोच नहीं हो रहा है. विपक्षी दलों में दलबदल करवाने और उनके द्वारा चलाई जा रही राज्य सरकारों को गिराने के लिए ईडी, सीबीआई, आयकर विभाग जैसी एजेंसियों और यहां तक कि राज्यपाल कार्यालय का भी बेशर्मी से दुरुपयोग किया जा रहा है. ऐसा मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गोवा, अरुणाचल प्रदेश और हाल ही में महाराष्ट्र में हुआ है. इसके लिए बेहिसाब धन का इस्तेमाल किया जा रहा है. सार्वजनिक जीवन के अपने लंबे करियर में उन्होंने कभी भी ‘ऑपरेशन लोटस’ को लोकतंत्र के लिए इतना खतरनाक नहीं देखा. अगर निकट भविष्य में झारखंड में झामुमो-कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने के लिए इसी तरह की गंदी रणनीति अपनाई जाए तो आश्चर्य नहीं होगा. यशवंत सिन्हा ने कहा कि लोकतंत्र पर सबसे ताजा अटैक वो तरीके हैं, जिससे सत्तारूढ़ दल संसद सदस्यों के अधिकारों और स्वतंत्रता को दबाने की कोशिश कर रहा है. “भ्रष्ट”, “जुमलाजीवी”, “विश्वासघात” जैसे कई शब्दों को असंसदीय घोषित किया गया, जो संसद में स्वतंत्र बहस का मजाक बनाता है. (नीचे देखे पूरी खबर)

भारत की इकॉनॉमी बेपटरी हो चुकी है, पटरी पर लाने की पहल जरूरी
इसके अलावा, सांसदों को अब संसद परिसर के अंदर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने से भी रोक दिया गया है. यशवंत सिन्हा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह से मिसमैनेज्ड है. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के मूल्य में सबसे बड़ी गिरावट वर्तमान प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान हुई है. जो रुपया 2014 में 58.44 का था, आज 80.05 तक पहुंच गया है. ये और गिर सकता है. अभूतपूर्व मूल्य वृद्धि ने आम लोगों को बुरी तरह प्रभावित किया है. उदाहरण के लिए 2014 में एक रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 410 रुपये थी. रांची में यह 1129 रुपये है. लगभग 300 फीसदी की वृद्धि. रिकॉर्ड बेरोजगारी ने देश के युवाओं के लिए एक अंधकारमय भविष्य बना दिया है. धर्मनिरपेक्षता हमारे संविधान की प्रस्तावना के स्तंभों में से एक है. सत्ताधारी दल और उनकी सरकार साम्प्रदायिक घृणा और हिंसा फैलाकर इसे सुनियोजित ढंग से खत्म करती रही है. चुनावी फायदे के लिए भारत के बहुधार्मिक समाज का ध्रुवीकरण किया जा रहा है. इसके परिणाम भारत की राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए अत्यंत खतरनाक हो सकते हैं. यशवंत सिन्हा ने कहा कि ऐसे समय में भारत को एक ऐसे राष्ट्रपति की जरूरत है जो संविधान के संरक्षक के रूप में कार्य करे. (नीचे देखे पूरी खबर)

राष्ट्रपति मौन रहे, रबर स्टांप रहे, ऐसा नहीं होने दीजिये
राष्ट्रपति को बिना किसी डर या पक्षपात के अपने स्वविवेक का इस्तेमाल करना चाहिए और जब भी आवश्यक हो, कार्यपालिका को संविधान के सिद्धांतों का उल्लंघन करने से रोकना चाहिए. अपने चुनाव अभियान के दौरान, यशवंत सिन्हा देश के सामने विभिन्न मुद्दों और चुनौतियों पर निडरता से अपने विचार रखे हैं. इस क्रम में उन्होंने साठ से अधिक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया है और मीडिया इंटरव्यू दिए हैं. उन्होंने ऐसा इसलिए किया है क्योंकि भारत के लोग गणतंत्र के सर्वोच्च पद के उम्मीदवारों से यह जानने की उम्मीद करते हैं कि देश के विभिन्न मुद्दों एवं चुनौतियों पर उनके विचार क्या हैं. हालांकि, मेरे प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार ने पूरे प्रचार अभियान के दौरान चुप्पी साध रखी है. उन्होंने भारत में आदिवासी समुदायों से संबंधित मुद्दों पर भी अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी. यशवंत सिन्हा ने कहा कि वे फिर से दोहराते है कि वे द्रौपदी मुर्मू का व्यक्तिगत रूप से बहुत इज्जत करते हैं. लेकिन वोट देने जा रहे सदस्यों एवं भारत के लोगों से कुछ सवाल हैं. उन्होंने कहा कि क्या भारत में एक मौन राष्ट्रपति होना चाहिए? क्या भारत में रबर-स्टांप राष्ट्रपति होना चाहिए? भारत के अगले राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री की रक्षा करनी चाहिए या संविधान की रक्षा करनी चाहिए? श्री सिन्हा ने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव में कोई व्हिप नहीं होता है. ये गुप्त मतदान के माध्यम से होता है. संविधान के महान निर्माताओं ने गुप्त मतदान की विधि इसीलिए तैयार की थी ताकि राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेने वाले सदस्य अपनी पार्टी के निर्णय से बाध्य होने की बजाए स्वतंत्र रूप से अपने अंतरआत्मा की आवाज सुनें इसलिए, श्री सिन्हा ने एक बार पुनः सभी सांसदों और विधायकों से विनम्रतापूर्वक अपील की है कि दल एवं पार्टी से उपर उठकर उनको वोट दें.





