रांची : झारखंड के हेमंत सोरेन की सरकार का विस्तार होने जा रहा है. इस विस्तार में कोल्हान (पूर्वी सिंहभूम, पश्चिम सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां) को तीन सीटें दी गयी है. सीट के हिसाब से कोल्हान को तीन सीटें दी गयी है, लेकिन चौथा विधायक भी कोल्हान से ही जुड़ा हुआ है. आपको बताते है कैसे. पहले जान लीजिये तीन लोग कौन-कौन कोल्हान के विधायक है, जो मंत्री बने है और क्यों बनाये गये है. सरायकेला से कद्दावर झामुमो नेता झारखंड टाइगर चंपई सोरेन एक बार फिर से मंत्री बनने वाले है. इससे पहले भी वे मंत्री रह चुके है. इसके अलावा पश्चिम सिंहभूम जिले के मनोहरपुर विधानसभा से झारखंड आंदोलनकारी स्वर्गीय देवेंद्र मांझी की पत्नी जोबा मांझी को मंत्री बनाया गया है. जोबा मांझी पहले भी मंत्री रह चुकी है. इसके अलावा जमशेदपुर पश्चिम के विधायक बन्ना गुप्ता भी दोबारा मंत्री बन रहे है. बन्ना गुप्ता इससे पहले भी मंत्री रह चुके है और काफी कम समय के लिए वे मंत्रिमंडल में थे, लेकिन इस बार पूरे पांच साल के लिए उनको मंत्री बनाया जा रहा है. वैसे इस मंत्रिमंडल विस्तार में मिथलेश ठाकुर उर्फ मुन्ना ठाकुर का भी नाम है, जो पश्चिम सिंहभूम जिले के चाईबासा के ही रहने वाले है.
मंत्रियों के बारे में जानिये क्या है उनका बैकग्राउंड :

चंपई सोरेन-झामुमो-पूर्वी सिंहभूम जिले के झिलिंगगोड़ा के सुदूरवर्ती गांव के रहने वाले चंपई सोरेन झारखंड के बड़े आंदोलनकारी नेता है. सरायकेला विधानसभा क्षेत्र से सिर्फ एक बार चुनाव हारे है और 6 बार चुनाव जीते है. इससे पहले वे परिवहन मंत्री हेमंत सोरेन की ही सरकार में रह चुके है. गुरुजी शिबू सोरेन और उससे पहले के झारखंड अलग राज्य के आंदोलनकरने वाले नेताओं के साथ रहे है. उनकी पहचान कद्दावर नेता के रुप में है और उनको झारखंड टाइगर के नाम से भी जाना जाता है. झिलिंगगोड़ा के रहने वाले किसान सिमल सोरेन और मां माधो सोरेन के बड़े बेटे है चंपई सोरेन. उनकी पत्नी मानको सोरेन है. उनके चार बेटे और तीन बेटियां भी है. चंपई सोरेन पहली बार निर्दलीय चुनाव लड़े थे और पूर्व विधायक कृष्णा मार्डी को शिकस्त दी थी. वे झारखंड अलग राज्य के आंदोलन में जेल जा चुके है और उनके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज है.

बन्ना गुप्ता–कांग्रेस-बन्ना गुप्ता जमशेदपुर पश्चिम के विधायक है. कदमा निवासी बन्ना गुप्ता जमीन से जुड़े नेता के रुप में जााने जाते है. मुसलिम समुदाय में उनकी अच्छी पकड़ के साथ ही हिंदू बहुल एरिया में भी उनकी अच्छी खासी पकड़ है. वे टेम्पोवालों के आंदोलन की उपज है जबकि कांग्रेस को कोल्हान में अकेला विधायक देने वाले भी है. कोल्हान में फिलहाल उनके समकक्ष का कोई भी नेता नहीं है, जो मंत्रीपद की दावेदारी कर सके. कदमा निवासी बन्ना गुप्ता के पिता रामगोपाल गुप्ता कदमा बाजार में मिठाई की दुकान चलाते थे. उत्तरप्रदेश के नौगावां के मूलवासी है. वे को-ऑपरेटिव कॉलेज की पढ़ाई कर चुके है. बन्ना गुप्ता की पत्नी के अलावा उनके बच्चे भी है जबकि उनके एक भाई सतीश गुप्ता टीएमएच में डॉक्टर है जबकि एक भाई गुड्डू गुप्ता केबुल ऑपरेटर है. उनके एक और भाई टप्पू गुप्ता आज भी मिठाई की दुकान चलाते है जबकि एक और भाई सुबोध गुप्ता भी कारोबारी ही है.

जोबा मांझी-झामुमो-जोबा मांझी पांच बार विधायक रह चुकी है जबकि 2009 के चुनाव में उनको हार का मुंह देखना पड़ा था. वे पहले यूजीडीपी पार्टी से जुड़ी ती और बाद में वह झामुमो में शामिल हो गयी. जोबा मांझी सिंहभूम के जंगल आंदोलन के बड़े नेता देवेंद्र मांझी की पत्नी है. वे पहली बार बने झारखंड सरकार में भी मंत्री रही थी. 2000 से 2003 में बाबूलाल मरांडी की सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुकी है जबकि 2003 से 2005 तक अर्जुन मुंडा की सरकार में महिला, बाल विकास और समाज कल्याण विभाग की मंत्री रही है.

मिथलेश ठाकुर उर्फ मुन्नु ठाकुर-झामुमो-मिथिलेश ठाकुर चाईबासा के रहने वाले है. वे चाईबासा जिला नगर पर्षद के अध्यक्ष रहे है और वे चाईबासा के साथ ही गढ़वा में भी राजनीतिक पैठ बनाते रहे है. इससे पहले भी झामुमो ने उनको टिकट दी थी, लेकिन वे चुनाव हार गये थे. पहली बार इस बार के चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की, जिसके बाद उन्होंने चाईबासा नगर पर्षद के चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे दिया. वे झामुमो के कद्दावर नेता रहे है और गुरुजी शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन के पश्चिम सिंहभूम जिले के अलावा बिहारी बहुल गढ़वा, पलामू क्षेत्र में काम करते रहे है. इसके अलावा उनका माइंस कारोबारियों पर पकड़ रहा है और वे झामुमो के फाइनांसर के रुप में भी जाना जाता रहा है.

बादल पत्रलेख-कांग्रेस-बादल पत्रलेख देवघर जिले के जरमुंडी के विधायक रहे है. वे दूसरी बार विधायक बने. उन्होंने पूर्व मंत्री हरिनारायण राय को चुनाव में हराया था और पहली बार कांग्रेस के विधायक बने थे. वे विधायक बनने के बाद भी ऑटो से ही आना जाना करते थे. बादल पत्रलेख के पास अपना एकाउंट और गाड़ी तक नहीं थी. वे दो बार विधायक रह चुके है. बादल पत्रलेख सीधे साधे नेता रहे है. वे एक ब्राह्मण चेहरा रहे है.

जगरनाथ महतो-झामुमो-जगरनाथ महतो डुमरी के विधायक है. 1967 को जन्मे जगरनाथ महतो अलारगो के जन्में है. उनके पिता नेमनारायण महतो और मां गुंजरी देवी किसान है. उनके एक पुत्र और चार पुत्री है. उनके चार भाई और एक बहन है. मैट्रिक पास जगरनाथ महतो इससे पहले चार बार विधायक रह चुके है और झारखंड अलग राज्य आंदोलन में करीब छह बार जेल की यात्रा कर चुके है. वैसे वे मुंशी प्रेमचंद की किताबें पढ़ने के शौकीन है. स्वर्गीय बिनोद बिहारी महतो को आदर्श मानने वाले जगरनाथ महतो बोकारो के नावाडीह के भंडारीदह सिमराकुल्टी के अलारगो गांव के रहने वाले है. वे पहली बार मंत्री बन रहे है. कुड़मी कोटे से उनको मंत्रीपद दिया जा रहा है.

हाजी हुसैन अंसारी-झामुमो-हाजी हुसैन अंसारी झामुमो के मधुपुर के विधायक है. वे चार बार के विधायक है. 1995 में पहली बार विधायक बने थे जबकि वे 2000 में चुनाव जीते, लेकिन फिर उनको हार का मुंह देखना पड़ा. बाद में वर्ष 2010 में एक बार जीते और इस बार एक बार फिर से चुनाव जीते. वे इससे प हले भी मंत्री रह चुके है. देवघर जिले के मधुपुर के रहने वाले हाजी हुसैन अंसारी झामुमो के कद्दावर मुसलिम मंत्री है. वे हेमंत सोरेन के पूर्ववर्ती सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय देख चुके है. 73 वर्षीय हाजी हुसैन अंसारी की शिक्षा देवघर से ही हुई है. कांग्रेस से झामुमो में आये हाजी हुसैन अंसारी 2003 से लेकर 2004 तक विपक्ष के नेता रह चुके है.






