
संतोष वर्मा/सुभाष सवैया
चाईबासा : पश्चिम सिंहभूम जिले से महज महज 20-25 किमी दूर टोंटो प्रखंड में पड़ने वाले बामेबासा उपस्वास्थय केंद्र ग्रामीणों के लिए भलें ही इलाज की सुविधा देने के लिए बनायी गयी थी, लेकिन उक्त भवन मकड़जालों का भवन कर रह गया है. इसको ठीक करने के लिए स्वास्थ विभाग द्वारा किसी तरह की कोई पहल नहीं की गयी है. नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद लोगों को स्वास्थ्य सुविधा तक नहीं पहुंच पा रही है. अगर बात की जाये स्वास्थ्य विभाग की तो यह कागजों में जरूर चल रहा है, लेकिन हालात यह है कि जिला स्वास्थ्य विभाग अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन छह साल से यह खुला तक नहीं है.

हालात यह है कि छह साल से उक्त उपस्वास्थ्य केंद्र में न तो कोई डॉक्टर है और न ही कोई नर्स ही है. बामेबासा पंचायत के बामेबासा गांव में बने इस उप स्वास्थ्य केन्द्र का भवन छह साल पहले बना था. लेकिन गांव के ग्रामीणों ने आज तक उसमें डॉक्टर व नर्स को नहीं देखा है. उपस्वास्थ्य केंद्र के मुख्य दरवाजे में लगे ताले का जंग भी इसकी सच्चाई बयां करता है. ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कभी इस स्वास्थ्य केन्द्र को खुलते नहीं देखा है. जब से बना है ताला ही लगा है. केंद्र की अंदरूनी दीवारों पर जमे मकड़ी के जाल व फर्श पर जमी धूल-मिट्टी बता रही है कि वर्षों से इसके अंदर किसी इंसान ने कदम नहीं रखा है. पास में बने चापाकल भी खराब पड़ा है. शौचालयों में भी ताला लगा है. ग्रामीण कहते हैं कि इस स्वास्थ्य को खुलवाने के लिए उपायुक्त-विधायक तक से गुहार लगाई जा चुकी है. लेकिन नतीजा सिफर ही है.
क्या है ग्रामीणों की समस्या
बामेबासा गांव के बामिया बारी ने बताया कि भवन बनने के बाद भी यह उप स्वास्थ्य केन्द्र चालू ही नहीं किया गया. इसका खामियाजा बामेबासा पंचायत की साढ़े पांच हजार की आबादी को भुगतना पड़ रहा है. बीमार होने पर सीधे जिला मुख्यालय चाईबासा जाना ही एकमात्र विकल्प है जबकि चाईबासा यहाँ से तेरह किलोमीटर दूर है. उन्होंने बताया कि सांसद, विधायक व उपायुक्त से भी कई बार केंद्र चालू कराने की मांग की चुकी है, पर समस्या जस की तस है. स्वास्थ्य केन्द्र के अभाव में ग्रामीण अंधविश्वास का शिकार हो रहे हैं जो दुर्भाग्यपूर्ण है. अजीत सिंह कुंटिया तथा बनमाली बारी का कहना है कि बामेबासा के अलावा गुंडीपोसी गांव में बने स्वास्थ्य उपकेन्द्र भी इतने ही सालों से नहीं खुला है. इन दोनों स्वास्थ्य उपकेन्द्रों को चालू कराने के लिए 1 फरवरी 2019 को अपर उपायुक्त व टोंटो के प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी को भी चिट्ठी सौंपी गई थी. बावजूद कुछ नहीं हुआ. उन्होंने बताया कि बरसात में गर्भवती महिला व गंभीर रोगियों को चाईबासा ले जाना बेहद मुश्किल है क्योंकि इधर की सड़के भी बेहद जर्जर है. ऐसे में दोनों ही स्वास्थ्य उपकेन्द्रों को अविलंब चालू किये जाने की आवश्यकता है.









