
जमशेदपुर : जमशेदपुर के सोनारी निवासी मौनी बाबा आश्रम के मौनी बाबा ने गुरुवार को समाधि ले ली. उनके मौनी बाबा मंदिर में ही उनके पार्थिक शरीर को समाधि दी गयी. बुधवार को उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया था. मौनी बाबा के पार्थिव शरीर का स्नान कराने के बाद उनको अंतिम दर्शन के लिए मंदिर परिसर में रखा गया और फिर एक खुले जीप में उनके अंतिम दर्शन के लिए नगर भ्रमण कराया गया. खुली जीप में उनको ले जाया गया. इस मौके पर जूना अखाड़ा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महंत विद्यानंद सरस्वती जी खुद मौजूद थे, जिनकी देखरेख में समाधि दी गयी. इस दौरान भक्तों की काफी भीड़ उमड़ पड़ी थी.

1968 में दोमुहानी नदी के किनारे पर मौनी बाबा ने अपना आश्रम स्थापित किया था, जो अब भव्य मंदिर बनकर तैयार हो चुका है. मौनी बाबा आश्रम के संस्थापक के तौर पर श्रीश्री गंगा गिरी उर्फ मौनी बाबा को हमेशा याद किया जाता रहेगा. वे कुछ बोल नहीं पाते थे, जिस कारण उनका नाम मौनी बाबा रखा गया था. जब वे तीन साल के थे, तब हरिद्वार के कुंभ में अपने परिवार से बिछुड़ गये थे. इसके बाद वे गंगोत्री आश्रम के साधु संतों के साथ हो लिये और बाबा 1968 में जमशेदपुर आये.
सोनारी में कौशल्या देवी ने उनको दान में जमीन दी, जिसके बाद भव्य मंदिर 1970 में बनकर तैयार हो गया. 1971 से बाबा वहीं तपस्या करने लगे, जिसका समापन 1981 को हुआ. लगभग दस साल के बाद वे बाहर आये और एकादश महारुद्र यज्ञ और विराट संत सम्मेलन हुआ, जिसमें देश भर के साधु-संत जुटे थे.







