
रांची : झारखंड हाईकोर्ट द्वारा 13 अनूसूचित जिलों में बहाल किये गये 3684 शिक्षकों की नियुक्ति को निरस्त करने को लेकर दिये गये आदेश पर देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. इससे झारखंड के 13 जिलों के शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट में झारखंड के शिक्षकों द्वारा याचिका दायर की गयी थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर तत्काल रोक लगाते हुए राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है. इससे झारखंड के 13 जिलों में बहाल किये गये 3684 शिक्षकों को राहत मिली है. अब राज्य सरकार इस मामले में अपना जवाब दाखिल करेगी, जिसमें सरकार अपना पक्ष रखेगी, जिसके बाद शिक्षकों के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट में फैसला आ सकता है. अगली सुनवाई 4 नवंबर को निर्धरित की गयी है, जिसमें फैसला आ सकता है. वैसे शिक्षकों के पक्ष में फैसले आने की बात की बड़ी वजह यह है कि खुद सत्ता पक्ष यानी झामुमो और कांग्रेस चाहती है कि शिक्षकों की नियुक्ति खारिज नहीं हो जबकि खुद विपक्षी पार्टी भाजपा और आजसू भी यहीं चाहती है. सरकार के हलफनामा जाने के बाद इस पर सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना सकती है. जानकार बताते है कि इसमें शिक्षकों के पक्ष में फैसला आ सकता है. 13 अनुसूचित जिलों के पद पर उसी जिले के स्थानीय निवासी के लिए आरक्षित था, पूर्वी सिंहभूम के लिए 972, पश्चिम सिंहभूम के लिए 1187,सरायकेला के लिए 709, रांची के लिए 1013, खूंटी 387, गुमला 696, सिमडेगा 427, लोहरदगा 333, लातेहार 573, दुमका 959, जामताड़ा 539, पाकुड़ 486 और साहेबगंज के लिए 589 सीट निधार्रित की गयी थी, जिसके तहत बहाली की गयी थी. इस मसले को लेकर 21 सितंबर 2020 को झारखंड हाईकोर्ट ने रघुवर दास की सरकार में लागू किये गये नियोजन नीति को ही खारिज कर दी थी.
क्या है पूरा मामला :
राज्य सरकार के नियोजन नीति के तहत 13 जिले को आरक्षित और 11 जिले को गैर आरक्षित रखा गया था. राज्य सरकार के इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को लेकर 21 सितंबर 2020 को झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 18 हजार शिक्षक नियुक्ति की प्रक्रिया के लिए निकाले गये विज्ञापन को भी खारिज कर दिया था. हाईकोर्ट की तीन न्यायाधीश जस्टिस एससी मिश्र, जस्टिस एस चंद्रशेखर और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने एकमत से इस आदेश को पारित किया था. हाईकोर्ट के आदेश के बाद झारखंड में रघुवर दास की सरकार द्वारा बनायी गयी नियोजन नीति लागू करने पर रोक लग गयी थी. इस नीति में अनुसूचित जिलों में गैर अनुसूचित जिलों के लोगों को नौकरी के लिए अयोग्य माना गया था जबकि अनुसूचित जिलों के लोग गैर अनुसूचित जिले में नौकरी के लिए आवेदन कर सकते थे. नियोजन नीति को लेकर सोनी कुमारी नामक एक लड़की ने याचिका दायर की थी, जिसमें यह कहा गया था कि गैर अनुसूचित जिले की रहने वाली वह लड़की है और उसने दूसरे जिले में हाई स्कूल शिक्षक की बहाली की परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन उनका आवदेन रद्द कर दिया गया और बताया गया कि वह गैर अनुसूचित जिले की रहने वाली है, इस कारण वह आवेदन नहीं कर सकती है. अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि उनमें जो नियुक्ति प्रक्रिया थी, उसको रद्द करते हुए दोबारा नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू किया जाये.






