
जमशेदपुर : कोरोना की दूसरी लहर के दौरान दवाई से लेकर ऑक्सीजन और वेंटिलेटर बेड के लिए अस्पतालों के चक्कर काटते लोग नजर आ रहे हैं. इधर कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम अस्पताल का नजारा भी भयावह है. वैसे तो करोड़ों रुपए सालाना बजट वाले इस अस्पताल में बदहाली और बदइंतजामी सालों भर देखने को मिलती है, लेकिन वैश्विक आपदा की घड़ी में यहां का नजारा क्या हो रहा होगा इसे आप बस महसूस ही कर सकते हैं. यहां मरीजों की सेवा में दिन रात लगे सफाइकर्मी और स्वास्थ्यकर्मी 24- 24 घंटे ड्यूटी बजाने को मजबूर हैं. ये भी मरीजों की सेवा करते करते थक चुके हैं. इतने बड़े अस्पताल में महज डेढ़ सौ सफाइकर्मियों के भरोसे मरीजों का इलाज चल रहा है. आप समझ सकते हैं कि यहां के सफाइकर्मियों की क्या स्थिति हो रही होगी. पिछली बार जब कोरोना का संक्रमण फैला था, सरकार ने आनन-फानन में यहां सफाई और स्वास्थ्य कर्मियों को अनुबंध पर बहाल किया था, लेकिन जैसे ही कोरोना वायरस संक्रमण कम हुआ सभी सफाई कर्मियों को हटा दिया गया. इस वैश्विक आपदा से लड़ते-लड़ते कई सफाई कर्मी मौत के गाल में समा गए. (नीचे भी पढ़ें)

बताया जाता है कि कई स्थाई सफाइकर्मी सेवानिवृत्त हो चुके हैं. अबतक सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस अस्पताल में सफाइकर्मियों की नियुक्ति नहीं की गई है. ऐसे में यहां दिन-रात सेवा में जुटे सफाइकर्मी भी भगवान से इस वैश्विक आपदा से निजात दिलाने की फरियाद लगाते देखे जा रहे हैं. इनका कहना है कि अब अगर सरकार की ओर से सुविधाएं नहीं बढ़ाई जाती हैं, तो सफाइकर्मियों की बहाली नहीं कराई जाती है, तो उनके लिए यहां सेवा देना दुश्वार हो जाएगा. कर्मचारी महासंघ ने सरकार से अस्पताल में सफाई एवं स्वास्थ्यकर्मियों की अविलंब बहाली कराए जाने की मांग की है. साथ ही जो सफाईकर्मी मर चुके हैं, उनके आश्रितों को मुआवजा दिए जाने की मांग की है. महासंघ ने नियमित सफाई कर्मियों की नियुक्ति एमजीएम अस्पताल में सुनिश्चित कराए जाने को लेकर सरकार से फरियाद लगाई है. कुल मिलाकर जमशेदपुर जो राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता का गृह जिला भी है, यहां कमोबेश सभी अस्पतालों की स्थिति यही हो चुकी है. खासकर एमजीएम जैसे इकलौते सरकारी अस्पताल में अगर बदहाली और बदइंतजामी का आलम रहेगा तो, आखिर गरीब मरीज जाए तो कहां जाएं.





