
जमशेदपुर : आदिवासी “हो” समाज बिरसानगर द्वारा शुक्रवार को मागे बोंगा पूजा बड़े ही श्रद्धा उत्साह के साथ मनाया गया. बिरसानगर हो समाज भवन में तीन दिवसीय मागे परब के मौके पर सरना पूजा स्थल में पुजारी दिउरी सीताराम हेंब्रोम एवं सुरा गगराई द्वारा पूजा की गई और इसके साथ ही अच्छी बारिश सुख समृद्धि के लिए सिंग बोगा मागे बोंगा किया गया. सफेद मुर्गा सिंग बोंगा एवं लाल मुर्गा ग्राम देवता अर्पित किया गया. काला मुर्गा को हवा में उड़ा कर तीर द्वारा मागे बोंगा किया गया. इस मौके पर आदिवासी हो समाज महासभा जिला समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व पुलिस पदाधिकारी जयपाल सिरका ने बताया कि माघ महीना के माघ पूर्णिमा के समय मां के पूर्व मनाया जाता है और यह हो जनजाति का सबसे बड़ा त्योहार है. महासचिव संतोष कुमार पूर्ति के अनुसार तीन दिवसीय मागे पोरोब के तहत विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं खेल कूद का आयोजन होगा. इस मौके पर अध्यक्ष सोमनाथ बानरा, कोषाध्यक्ष रामलाल जोंको सह सचिव परगना बारी, प्रकाश को या छोटू बोदरा, लिटामान सिंह, रामसिंह बानरा उपस्थित थे और इसे सफल बनाने में संजीव बोदरा, रोशन बारी, दीपक बिरुली, सोमनाथ बानरा, प्रियंका सिरका आदि का सराहनीय योगदान रहा. (नीचे देखे पूरी खबर)

सीतारामडेरा में मनाया गया देशाउली मागे पोरोब
दूसरी ओर, आदिवासी हो समाज सीतारामडेरा की ओर से देशाउली मागे पोरोब का भव्य आयोजन आदिवासी +2 उच्च विद्यालय सीतारामडेरा प्रांगण में किया गया. मागे पोरोब का दूसरा दिन यानी मागे पूजा दिउरी मंगल हंसदा एवं उनके सहयोगी सुभाष सोय और दामोदर हंसदा द्वारा किया गया. देशाउली सिंगबोंगा एवं ग्राम देवता सबके नाम से लाल, सफेद, बारह बोरनी मुर्गे और काले मुर्गी की बली देशाउली जहेरथान में दी गई. समस्त बस्तीवासियों के मंगलमय स्वस्थ की कामना की गयी. हो समुदाय के मान्यता अनुसार दियूरी मंगल हंसदा ने कहा कि यह पर्व मनाने की प्रथा सदियों से चली आ रही है. इसकी शुरुआत इस धरती के प्रथम मानव लुकू और लुकुमी ने की थी. हो समाज सीतारामडेरा के अध्यक्ष राजेश कांडेयोंग ने कहा कि मागे पर्व हो समुदाय का बहुत बड़ा एवं प्रमुख पर्व है. इस पर्व में सभी अपने-अपने घरों में मेहमानों को बुलाते है. पकवान हेतु लेटो मंडी बनाया जाता है. यह पर्व सीतारामडेरा में हर साल बहुत धूमधाम से मनाते है. हो समुदाय के लोग महीने भर पहले से ही इसकी तैयारी में लग जाते है. ऐसी मान्यता है की यह पर्व करने से किसी तरह की महामारी का प्रकोप नहीं होता है. कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से संगीता सामड , राजकुमार हेमब्रॉम, दुर्गामुनी, प्रियंका बिरुआ, शबनम बारी, महावीर पडेया, जीतराम बारदा, दोनो हंसदा, दामु सोय, कृष्णा सुंडी, पियूष बोदरा, रोहित बांद्रा,रितेश बांद्रा, सोनू पूर्ति, सुमित बरदा, रिक्की गिलुआ, अनिल सोय, सौरभ बोदरा एवं समस्त बस्तीवासियों का सहयोग रहा.






