
रांची : झारखंड सरकार ने धनबाद और बोकारो समेत अन्य जिलों से मगही और भोजपुरी को क्षेत्रीय भाषा से हटा दिया गया. राज्य के मंत्री जगरनाथ महतो के डिमांड को पूरा किया गया और कई आदिवासी और मूलवासी विधायकों ने भोजपुरी और मगही भाषा को हटाने की मांग कर दी थी. लेकिन भोजपुरी और मगही को बाहर का रास्ता दिखा देना और हर जिले में ऊर्दू को ही क्षेत्रीय भाषा के तौर पर अनिवार्य रुप से रखा गया है, जिसको लेकर सवाल उठना शुरू हो चुका है. सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर ऊर्दू बोलने वाले कितने लोग राज्य में है. इसको लेकर जगरनाथ महतो ने रांची में मीडिया से बातचीत करते हुए साफ तौर पर कहा है कि यह मसला काफी गंभीर था और सरकार ने बेहतर फैसला लिया है. हम लोगों को गुरुजी शिबू सोरेन का राज्य बनाना है. इसके विपरित राज्य के प्रमुख सहयोगी पार्टी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा है कि भाषा को लेकर एकरुपता रखा जाना चाहिए और सहयोगी दलों से बातचीत करके ही कोई फैसला लिया जाना चाहिए. बार बार भाषा को लेकर बदलाव करने से सरकार की छवि बेहतर नहीं होती है. भाजपा ने इसको तुष्टिकरण की नीति बतायी है और कहा है कि राज्य सरकार फूट डालो राज करो की नीति पर काम कर रही है और भाषा को लेकर विवाद फैलाने की कोशिश हो रही है. फिलहाल, मामला गर्माता नजर आ रहा है और भाषा पर संग्राम शुरू होने की उम्मीद है.
हेमंत सोरेन की सरकार ने देर रात जारी की अधिसूचना
झारखंड सरकार ने अंतत: मगही और भोजपुरी को अपने भाषा की सूची से बाहर कर ही दिया है. धनबाद और बोकारो से भी भोजपुरी और मगही भाषा को बाहर कर दिया गया है जबकि अन्य जिलों में भी उनको जगह नहीं दी गयी है. शुक्रवार की देर रात को झारखंड सरकार ने इस पर फैसला लेने संबंधित अधिसूचना जारी की है. इसके तहत कहा गया है कि 24 दिसंबर को जो सूची जारी की गयी थी, उसको खत्म करते हुए झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा मैट्रिक और इंटर की प्रतियोगिता परीक्षाओं में जिलास्तरीय पदों के लिए अलग-अलग भाषाओं को जगह दी गयी है. भोजपुरी को सिर्फ पलामू और गढ़वा में रखा गया है जबकि अन्य जिलों से हटा दिया गया है. अकेले जमशेदपुर जैसे जिले, जहां सबसे ज्यादा भोजपुरी बोलने वाले है, वहां से भी इस भाषा को हटा दिया गया है.
जिलावार जनजातीय भाषा और क्षेत्रीय भाषा की सूची
रांची जिला
जनजातीय भाषा-कुड़ूख, खड़िया, मुंडारी, हो, संथाली
क्षेत्रीय भाषा-नागपुरी, पंचपरगनिया, ऊर्दू, कुरमाली, बंगला
लोहरदगा जिला
जनजातीय भाषा-कुड़ुख, असुर, बिरजिया
क्षेत्रीय भाषा-ऊर्दू और नागपुरी
गुमला जिला
जनजातीय भाषा-कुड़ूख, खड़िया, असुर, बिरहोरी, बिरजिया, मुंडारी
क्षेत्रीय भाषा-ऊर्दू और नागपुरी जिला
पश्चिम सिंहभूम जिला
जनजातीय भाषा-हो, भूमिज, मुंडारी, कुड़ूख, संथाली
क्षेत्रीय भाषा-कुरमाली, ऊर्दू और ओड़िया
पूर्वी सिंहभूम जिला (जमशेदपुर)
जनजातीय भाषा-मुंडारी, हो, भूमिज, संथाली, कुड़ुख
क्षेत्रीय भाषा-कुरमाली, बंग्ला, ऊर्दू और उड़िया
सरायकेला-खरसावां जिला
जनजातीय भाषा-संथाली, मुंडारी, भूमिज, हो
क्षेत्रीय भाषा-पंचपरगनिया, ऊर्दू, उड़िया, बंग्ला, कुरमाली
लातेहार
जनजातीय भाषा-कुड़ुख, असुर, बिरजिया
क्षेत्रीय भाषा-नागपुरी, ऊर्दू, मगही
पलामू जिला
जनजातीय भाषा-कुड़ुख, असुर
क्षेत्रीय भाषा-नागपुरी, ऊर्दू, मगही, भोजपुरी
गढ़वा जिला
जनजातीय भाषा-कुड़ुख
क्षेत्रीय भाषा-नागपुरी, मगही, ऊर्दू, भोजपुरी
दुमका जिला
जनजातीय भाषा-संथाली, माल्तो
क्षेत्रीय भाषा-खोरठा, बंग्ला, ऊर्दू, अंगिका
जामताड़ा जिला
जनजातीय भाषा-संथाली
क्षेत्रीय भाषा-खोरठा, ऊर्दू, बंग्ला, अंगिका
साहेबगंज जिला
जनजातीय भाषा-संथाली, माल्तो
क्षेत्रीय भाषा-खोरठा, बंग्ला, ऊर्दू और अंगिका
पाकुड़ जिला
जनजातीय भाषा-संथाली, माल्तो
क्षेत्रीय भाषा-खोरठा, बंग्ला, ऊर्दू, अंगिका
गोड्डा जिला
जनजातीय भाषा-संथाली, माल्तो
क्षेत्रीय भाषा-खोरठा, ऊर्दू, अंगिका और बंग्ला
हजारीबाग जिला
जनजातीय भाषा-संथाली, कुड़ुख, बिरहोरी
क्षेत्रीय भाषा-नागपुरी, कुरमाली, ऊर्दू और खोरठा
कोडरमा जिला
जनजातीय भाषा-संथाली
क्षेत्रीय भाषा-कुरमाली, ऊर्दू, खोरठा
चतरा जिला
जनजातीय भाषा-संथाली, कुड़ुख, मुंडारी, बिरहोरी
क्षेत्रीय भाषा-नागपुरी, ऊर्दू, खोरठा, मगही
बोकारो जिला
जनजातीय भाषा-संथाली, हो, मुंडारी
क्षेत्रीय भाषा-नागपुरी, कुरमाली, खोरठा, ऊर्दू, बंग्ला
धनबाद जिला
जनजातीय भाषा-संथाली
क्षेत्रीय भाषा-नागपुरी, खोरठा, कुरमाली, ऊर्दू, बंग्ला
गिरीडीह जिला
जनजातीय भाषा-संथाली
क्षेत्रीय भाषा-खोरठा, ऊर्दू, कुरमारी
देवघर जिला
जनजातीय भाषा-संथाली
क्षेत्रीय भाषा-खोरठा, अंगिका, ऊर्दू, बंग्ला
रामगढ़ जिला
जनजातीय भाषा-संथाली, कुड़ुख, बिरहोरी
क्षेत्रीय भाषा-नागपुरी, ऊर्दू, कुरमाली, खोरठा
खूंटी जिला
जनजातीय भाषा-कुड़ुख, खड़िया, मुंडारी
क्षेत्रीय भाषा-नागपुरी, पंचपरगनिया, ऊर्दू, कुरमाली





