पटमदा : महिलाओं को सशक्त बनने के लिए उनका आत्मनिर्भर होना जरुरी है और आत्मनिर्भर बनने के लिए सही प्रशिक्षण या किसी काम से जोड़ना जरुरी है. अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की कमी से मशीन से जुड़े काम करना या प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना मुश्किल हो जाता है. लेकिन झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा प्रखंड में महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए नाबार्ड के साथ मिलकर सेल्को फाउंडेशन सोलर ऊर्जा उपलब्ध करा रहा है, ताकि वे निर्बाध गति से प्रशिक्षण लेकर काम करें और रोजगार से जुड़ जाएं. पटमदा के माचा गांव के टैगोर सोसाइटी फ़ॉर रूरल डेवलोपमेन्ट की महिला समूह को बिजली की समस्या को देखते हुए सेल्को फाउंडेशन ने उनके ट्रेनिंग सेंटर में सोलर ऊर्जा उपलब्ध करवाई है, जिससे महिलायें अब बिना किसी परेशानी के मसाला पीसने, सेनेटरी पैड मेकिंग और दाल पैकेजिंग का काम कर रही हैं. (नीचे भी पढ़ें और देखें वीडियो)
कुछ समय पहले हालात ऐसे था कि यहां की महिलाएं प्रतिदिन 10 किलोमीटर दूर से चल कर आती थीं, जिसके बाद वहां बिजली नही होने की वजह से वे काम नही कर पाती थीं. इस तरह उनका पूरा दिन व्यर्थ जाता था. पहले सरकारी बिजली के माध्यम से इन सभी मशीनों को चलाया जाता था, जिससे बिजली नही रहने की वजह से काफी दिक्कतें आती थी. लेकिन सोलर पावर के लगने से अब महिलाओं को बिजली का इंतजार नहीं करना पड़ता है. अब महिलाएं अपने काम को सही वक्त पर समाप्त कर घर चली जाती हैं और अपने घर-परिवार को ज्यादा समय देकर खुश हैं. बिजली कटौती की मार झेलने वाली घनोश्री महतो बताती हैं कि, हमलोग दाल के पैकेजिंग का काम भी करते हैं. पहले ये सरकारी बिजली से होता था. हम काफी दूर से आते थे और बिजली नहीं रहने पर वे वापस लौट जाते थे. सोलर पावर के आने से आंधी-तूफान हो या झमाझम बारिश, बिजली लगातार रहती है और दाल पैकेजिंग का काम चलता रहता है. बाकी कामों में भी कोई बाधा नही आती. ये सभी महिलाएं मसालों में हल्दी, जीरा और मिर्च की पिसाई करती हैं. पीसने के बाद उसे छलनी से छाना जाता है और फिर पैकेट बनाया जाता है. 50 ग्राम, 100 ग्राम और 250 ग्राम के पैकेट, दाल के पैकेट व महिलाओं द्वारा निर्मित सेनेटरी पैड बाजारों में बेची जाती हैं जिससे उन्हें अच्छी खासी आमदनी होती है. (नीचे भी पढ़ें और देखें वीडियो)
सोलर पावर के लगने से रोजगार के साथ-साथ उनका हौसला भी बढ़ा है. अंबिका महतो का कहना हैं कि वो पहले सरकारी बिजली से मसाला पीसने का काम करती थीं. सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में बिजली के आने-जाने का कोई समय निर्धारित नहीं रहता था. कई बार तो ऐसा होता था कि वो काम करने के लिए पहुंचती थीं लेकिन बिजली नदारद रहने के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता था. अब, जब से सोलर पावर की व्यवस्था की गयी है तब से उन्हे 24 घंटा बिजली मिल रही है और काम करने मे कोई परेशानी भी नही होती है. नाबार्ड के मुख्य महा प्रबंधक बिनोद कुमार बिष्ट ने बताया कि (राष्ट्रीय कृषि ग्रामीण विकास बैंक) द्वारा वित्त पोषित एलईडीपी (आजीविका और उद्यम विकास कार्यक्रम) परियोजना के अंतर्गत मसाला और दाल के बेहतर उत्पादन, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग व मार्केटिंग आदि के लिए पटमदा के महिला समूहों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. बिजली की समस्या के कारण उन्हें काफी समस्या आ रही थी जिसे सेल्को फाउंडेशन द्वारा उत्पादन इकाई को सौरीकृत किए जाने से उत्पादन इकाई का परिचालन सुलभ हुआ है.उन्होंने ये भी कहा कि सेल्को फाउंडेशन हमारे राज्य के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण संस्था है जिनके मदद से हम एक बदलाव ला सकते है. (नीचे भी पढ़ें)
पटमदा के माचा गांव के टैगोर सोसाइटी के मधुसूदन महतो बताते हैं कि, करीबन 25 महिलाओं का समूह बनाया गया है जिसमें 99 महिलाएं काम करती हैं. ये महिलायें अपने समय और सहूलियत के अनुसार ग्रुप बनाकर मसाला पीसने, सेनेटरी पैड का निर्माण करने और दाल पैकेजिंग का काम करती हैं. इन सभी का पैकेट बनाकर इन्हें बाजारों में बेचती हैं. धीरे-धीरे अब ये महिलायें रोजगार से जुड़कर स्वावलंबी बन रही हैं. सेल्को फाउंडेशन के डायरेक्टर हुडा जाफर ने बताया कि तीन सालों में फाउंडेशन ने नाबार्ड के साथ मिलकर स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को रोजगार से जुड़ने में सहायता की है. इस वजह से यहां की महिलाओं की आय बढ़ी है और रोजगार के नए अवसर उनको प्राप्त हुए हैं.




