चांडिल : चांडिल डैम में ‘खेला’ हो रहा है, खेला सरकार को चूना लगाने का. इसका खुलासा आरटीआइ के तहत पूछे गये एक सवाल के आये जवाब से हुआ है, जिसके तहत बांध समिति पर सरकार का करीब 1.65671 करोड़ रुपये का बकाया निकलता है. इतना ही नहीं, बांध समिति का एग्रीमेंट समाप्त हो जाने के बाद भी समिति बगैर अनुमति के डैम में पर्यटकों को नौका विहार करा कर हर दिन किरीब 40 से 45 हजार रुपये कमा रही है, जिसका हिसाब न सरकार को दिया जा रहा है न ही विभाग को. इतना ही नहीं, समिति विभाग द्वारा दी गई नौकाओं की मरम्मत भी नहीं करा रही हैं, जिसके कारण डैम में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. बताया जा रहा है कि वर्ष 2007 के बाद से प्रशासन की ओर से नौका परिचालन की बंदोबस्ती नहीं की गई है, जिसके कारण वर्ष 2007 से लेकर अब तक करोड़ों रुपये के राजस्व की चोरी हो चुकी है. लेकिन इसके लिए जिम्मेवार कौन है, इसकी गहन जांच की जरूरत है.(नीचे भी पढ़ें)

उधर बताया जाता है कि स्थानीय मत्स्यजीवी सहकारी समितियों में भी जम कर ‘खेला’ चल रहा है. बिना एकरारनामे के समितियां डैम में मत्स्य पालन कर रही हैं जिसका लेखा-जोखा किसी के पास नहीं है. इस संबंध में पूछे जाने पर चांडिल एसडीओ ने इसे बेहद ही गंभीर मामला बताते हुए कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जांच करा कर बकाया राजस्व की वसूली की जायेगी एवं संचालन का जिम्मा भी दूसरी समिति को सौंपा जायेगा. (नीचे भी पढ़ें)
ऐसे में स्वाभाविक रूप से जो बड़ा सवाल उठता है, वह यह कि इतने सालों से आखिर किसके किसके इशारे पर सरकारी राजस्व की इतने बड़े पैमाने पर चोरी हो रही थी. स्वर्णरेखा परियोजना क्या कर रहा था. हालांकि मामला उजागर होने के बाद विभागीय स्तर से सर्टिफिकेट केस दर्ज कर लिया गया है. अब यह देखना होगा कि विभाग गबन किये गये राजस्व की किस प्रकार वसूली करता है.




