रांची: झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन सदन में कुल पांच विधेयक पारित हुए. इसमें झारखंड कोर्ट फीस( संशोधन) विधेयक 2022, झारखंड आकस्मिकता निधि(संशोधन) विधेयक, सोना देवी विवि विधेयक, बाबू दिनेश सिंह विवि विधेयक और झारखंड नगरपालिका (संशोधन)विधेयक शामिल है. सरकार ने जैन विवि विधेयक का वापस ले लिया है. प्रभारी मंत्र मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि कई विधायकों ने इस विधेयक को लेकर सुझाव दिए है. सरकार आगे उनके सुझाव पर विचार करते हुए ठोस निर्णय लेगी. फिलहाल विधेयक को वापस लिया जाता है. इससे पहले विधायक विनोद सिंह इस विधेयक को प्रवर समिति में भेजने का प्रस्ताव लाया.(नीचे भी पढ़े)
कहा कि इससे पहले अरका जैन विवि विधेयक विधानसभा में पारित हुआ है. इस बार इसी ट्रस्ट ने समान पते पर जैन विवि विधेयक को लाया गया है. अगर यह विधेयक पारित होता है तो छात्रों व सदन के साथ धोखाधड़ी होगी. राजमहल के विधायक अनंत ओझा ने कहा कि इस ट्रस्ट का जैन विवि विधेयक विधान सभा में पारित हो चुका है. एक विवि जमशेदपुर में खड़ा नहीं हो पाया है. निजी विवि को लेकर लाए गए विधेयक को प्रवर समिति में भेजने का प्रस्ताव लाते हुए कहा कि अब तक 20 निजी विवि विधेयक विधान सभा में पारित हो चुके है. इस बार फिर तीन नये विवि को लेकर विधेयक लाया गया है. उन्होंने कहा कि पहले जांच कर ली जाए कि इन विवि में दिशा निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं.(नीचे भी पढ़े)
डेमोग्राफी बदलने को लेकर हो रही राजनीति
झारखंड नगरपालिका (संशोधन) विधेयक को प्रवर समिति में भेजने को लेकर विनोद सिंह, अमर बाउरी, केदार हाजरा, बिरंची नारायण, मनीष जायसवाल ने प्रस्ताव लाया. इन्होंने कहा कि विधेयक में संशोधन लाकर सरकार डेमोग्राफी बदलने की राजनीति कर रही है. रोटेशन हटाकर सरकार जनसंख्या के आधार मेयर पद आरक्षित कर रही है. सरकार ने रांची में मेयर पद एसटी के लिए आरक्षित किया. राज्यपाल से अधिसूचना होने के बाद इसमें संशोधन ला रही है. इससे एससी अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. इनके मुंह से निवाला छिना जा रहा है. इसमें विसंगति है. सरकार चुनाव को लटकाना चाहती है. प्रभारी मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने कहा कि जनभावना को ध्यान में रख कर संशोधन लाया है.(नीचे भी पढ़े)
आदिवासी और गरीब न्याय से रह जाएंगे वंचित
झारखंड कोर्ट फीस (झारखंड संशोधन) विधेयक को प्रवर समिति में भेजने को लेकर विधायक अमर बाउरी, विनोद सिंह, लंबोदर महतो ने प्रस्ताव लाया. श्री बाउरी ने कहा कि यह संशोधन विधेयक जनता को प्रभावित करने वाला है. झारखंड में एससी-एसटी बहुल क्षेत्र है. प्रभावशाली लोग इनकी जमीन पर कब्जा कर लेते हैं. कोर्ट फीस में वृद्धि होने की वजह से गरीब न्याय पाने से वंचित रह जायेंगे. न्याय सुगम व सुलभ होना चाहिए. ऐसा करने से न्याय आदिवासियों की पहुंच से बाहर हो जायेगा. विनोद सिंह ने कहा कि सभी पहलुओं पर विचार नहीं हुआ है. ऐसे में यह विधेयक भी कोर्ट से खारिज हो सकता है. प्रभारी मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि कोर्ट के आदेश पर कमेटी का गठन किया गया. विचार-विमर्श कर ही विधेयक को लाया गया है.



