रामगोपाल जेना/ चक्रधरपुर: चक्रधरपुर प्रखंड के टेबो पंचायत के काड़ेदा में वनग्राम के प्रतिनिधिमंडल वनाधिकार समिति के अनुमंडल सदस्य मानी हंस मुंडा के नेतृत्व में गुरुवार को बंदगांव के सीओ के खिलाफ 80 वनग्राम के हजारों लोगों की बैठक हुई. बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सरकार अविलंब बंदगांव के सीओ अरुण सिंह का तबादला करे, नहीं तो मजबूर होकर यहां के वनग्राम के लोग सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन करने को विवश होंगे. मानी हंस मुंडा ने कहा कि यहां का सीओ वनग्राम के लोगों की बात सुनता ही नहीं है. उसके साथ ही वह वनग्राम का पट्टा भी देना नहीं चाहता है. वह वनग्राम के रहने वाले को कोई काम भी नहीं करता है. जबकि वन भूमि जमीन पर 50 से 55 सालों से लोग गांव बसर कर रह रहे हैं. लोगों का भौतिक सत्यापन कर वन पट्टा भी दिया गया है. मगर अब तक वन ग्राम का विकास नहीं हो पाया है. आज भी सड़क, तालाब, कुआं, जल मीनार समेत अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाई है. वन अधिकार कानून 2006 नियम 2008 और संशोधन नियम 2012 के तहत् वन ग्रामों को झारखण्ड सरकार द्वारा सर्वे कर खुटकुट्टी में घोषित कर वन ग्रामों को राजस्व गांव में बदलाव करें. ताकि वन ग्रामों के स्कूल बच्चों का जाति ,आवासीय प्रमाण पत्र वन सके. और वन ग्रामिणों लाभुको को भी सरकार द्वारा लाभ मिल सके. (नीचे भी पढ़े)
उन्होंने कहा सुप्रीम कोर्ट ने भी मान्यता दिया है कि जो आदिवासी सदियों से वनभूमि में रहते आएं हैं. उन लोगों को वन अधिकार कानून और आदिवासी अधिकार के तहत उसे वनभूमि पर अधिकार दिया जाता है. जिसको लेकर 80 वनग्राम को राजस्व गांव का दर्जा देने की मांग केंद्र व राज्य सरकार से की जा रही है. जबकि सीओ के अड़ियल रवैया के कारण वनग्राम के रहने वालों को उसका हक नहीं मिल पा रहा है. इसको लेकर कैबिनेट मंत्री जोबा मांझी को एक मांग पत्र सौपने का निर्णय लिया गया. जिसमे मांग किया गया है कि अविलंब सीओ को यहां से बदला जाय. इस मौके पर वन अधिकार आखड़ा सोतो: सांग्रोम संगठन के जिला अध्यक्ष विलसन सोय, धर्मदास बंकिरा, मंगलदास हंस, सुलिमन हंस, माधो पूर्ति, मंगरा हंस, मोरगा सोय, अब्राहम हंस, जोहन पूर्ति आदि लोग मौजूद थे.



