आदित्यपुर : सरायकेला-खरसावां के पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी के नेतृत्व में पुलिसिंग का नया नजरिया देखने को मिल रहा है. अपराधियों के खिलाफ सख्ती के साथ-साथ निर्दोष लोगों के प्रति संवेदनशीलता पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है. इसी सोच का उदाहरण आदित्यपुर थाना क्षेत्र में सामने आया, जहां साइबर अपराध की आशंका में हिरासत में लिए गए नौ युवकों को जांच में कोई ठोस सबूत नहीं मिलने पर सम्मानपूर्वक छोड़ दिया गया. गुप्त सूचना के आधार पर आदित्यपुर पुलिस ने एक प्रतिष्ठित होटल में छापामारी कर नौ संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया था. सूचना थी कि सभी साइबर अपराध से जुड़े हो सकते हैं. पुलिस ने तकनीकी जांच, पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों का गहन सत्यापन किया, लेकिन किसी भी युवक की साइबर अपराध में संलिप्तता साबित नहीं हो सकी. (नीचे भी पढ़ें)
आदित्यपुर थाना प्रभारी अंजनी सिंह ने बताया कि पुलिस अधीक्षक का स्पष्ट निर्देश है कि बिना ठोस साक्ष्य और पुष्टि के किसी भी व्यक्ति को न्यायिक हिरासत में नहीं भेजा जाएगा. इसी नीति के तहत जांच पूरी होने के बाद सभी युवकों को रिहा कर दिया गया. प्रारंभिक जांच में सामने आया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने होटल की ऑनलाइन बुकिंग कराई थी और फेसबुक के माध्यम से युवकों से संपर्क कर उन्हें होटल पहुंचने के लिए कहा था. उन्हें लालच दिया गया था कि उनके बैंक खातों में आने वाली राशि पर कमीशन मिलेगा. इस झांसे में आकर बिहार और झारखंड के विभिन्न जिलों के आठ युवक 30 जुलाई को आदित्यपुर पहुंचे थे. पुलिस का मानना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो ये युवक किसी बड़े साइबर गिरोह के मोहरे बन सकते थे और अनजाने में गंभीर अपराध में फंस जाते. (नीचे भी पढ़ें)
यह मामला सोशल मीडिया के जरिए फैल रहे साइबर अपराध के खतरे की भी चेतावनी है. फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से साइबर गिरोह बेरोजगार और कम उम्र के युवाओं को आसान कमाई का लालच देकर अपने जाल में फंसा रहे हैं. कई मामलों में युवाओं के बैंक खाते, मोबाइल नंबर और पहचान पत्र का इस्तेमाल साइबर ठगी और अवैध लेन-देन के लिए किया जाता है, जबकि कानूनी कार्रवाई की स्थिति में सबसे पहले वही युवक मुश्किलों में घिर जाते हैं. (नीचे भी पढ़ें)
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाता उपलब्ध कराना, कमीशन के बदले पैसों का लेन-देन करना या ऑनलाइन नौकरी के नाम पर बिना सत्यापन के काम करना गंभीर कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है. सरायकेला पुलिस की यह कार्रवाई केवल नौ युवकों को रिहा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि पुलिस का उद्देश्य केवल गिरफ्तारी करना नहीं, बल्कि अपराध को रोकना और निर्दोष युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखना भी है. साथ ही युवाओं के लिए यह सीख है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाली आसान कमाई के लालच और अनजान लोगों के प्रस्तावों से सतर्क रहें.




