जमशेदपुर : शुक्रवार संध्या 4:00 बजे से शहीद स्मारक समिति और डिमना डैम विस्थापित के संयुक्त तत्वावधान में साकची के बिरसा चौक स्थित बिरसा मुंडा स्मारक स्थल पर टाटा प्रबंधन के खिलाफ धरना प्रदर्शन एवं टाटा प्रबंधन का पुतला दहन किया गया. यह इसलिए कि टाटा प्रबंधन ने 3 मार्च के दिन पूरे शहर में रोड, रास्ता, चौक-चौराहा को लाइट से सजाया है, सिर्फ बिरसा मुंडा स्मारक स्थल को छोड़ दिया है. टाटा प्रबंधन धरती आबा का अपमान किया है. ये सिर्फ धरती आबा का अपमान नहीं है बल्कि संपूर्ण झारखंडी समाज का अपमान है. जिसके धरती पर टाटा कंपनी बसा है. उसी का अपमान करना यह प्रतीत होता है कि टाटा कंपनी आदिवासी विरोधी है. आदिवासी समाज को देखना नहीं चाहता है. षड्यंत्र के तहत आदिवासी समाज को नीचा दिखाने के मनसा से धरती आबा बिरसा मुंडा के प्रतिमा स्थल पर लाइट नहीं लगाया है. उन्होंने कहा कि झारखंडी समाज आज इसी के विरोध में प्रतिमा स्थल पर टाटा प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहा रहा हैं और टाटा प्रबंधन का पुतला दहन कर रहे हैं. (नीचे भी पढ़ें और देखें वीडियो)
टाटा पूरा दुनिया को दिखाता है कि जहां टाटा कंपनी है. वहां के लोगों के लिए टाटा मसीहा है. लेकिन वास्तविकता यह है कि टाटा कंपनी आदिवासी विरोधी है. आदिवासियों को देखना ही नहीं चाहता है. इसीलिए जमशेदपुर में स्थित डिमना डैम में विस्थापित लोगों को आज तक ना मुआवजा दिया ना उसके प्रति कोई संवेदना व्यक्त किया. आज डिमना डैम ही नहीं बल्कि पूरा टाटा शहर में विस्थापित आदिवासी मूलवासी लोग बेघर है. कंपनी झारखंडीयो के जमीन पर बना है जल जंगल जमीन हमारा है, लेकिन यहां नौकरी करने वाले लोग 99 परसेंट बाहरी है. यहां ठेकेदारी करने वाले लोग 99 प्रतिशत लोग बाहरी है टाटा कभी भी नहीं चाहता है कि झारखंडी लोग विकास करें. आज टाटा प्रबंधन ने जो दोहरा चरित्र दिखाया है ,इसके खिलाफ झारखंडी समाज एक होकर टाटा के खिलाफ आने वाले समय में पुरजोर आंदोलन करेंगे और टाटा के दोहरे चरित्र को पूरे दुनिया को दिखाएंग.




