शार्प भारत डेस्क : ट्रेन में सफर के दौरान ज्यादातर लोगों को खिड़की वाली सीट चाहिए होती हैं, कारण बिल्कुल स्पष्ट है ट्रेन के बाहर के खूबसूरत नजारे देखना. दूर-दूर तक खेत, जंगल, पहाड़ और खाली जमीन लोगों को अपनी ओर खींचती हैं. पर कैसा हो अगर आप ट्रेन में बैठे हो बाहर दूर-दूर तक सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा हो. भारतीय रेलवे ने इसकी भी सुविधा लोगों को दी हैं. अपने विशाल नेटवर्क और खासियतों के लिए भारतीय रेलवे दुनियाभर में प्रसिद्ध है. ऐसा एक ट्रैक तमिलनाडु में स्थित है. रामेश्वरम-पमबन रेलवे ब्रिज जो 100 साल पहले बना था. जिसकी लंबाई 2.2 किमी है. यह ट्रेन यात्रियों को प्रसिद्ध रामनाथस्वामी मंदिर लेकर जाती हैं. (नीचे भी पढ़ें)
100 साल पहले बने इस ब्रिज की सबसे खास बात यह है कि क्रूजर और जहाजों के गुजरने के समय यह बीच से खुल जाती है. खराब मौसम में पानी की लहरें ट्रेन में बैठे यात्रियों को भीगोती भी हैं. रोमांच के साथ-साथ कई यात्री इस अनुभव से डर भी जाते हैं. साल 1988 तक रामेश्वरम को अन्य जगहों से जोड़ने का इकमात्र जरिया यह ब्रिज ही हुआ करती था. साथ ही 2009 तक सबसे लंबी समुद्री ब्रिज होने का गौरव भी इसी के नाम दर्ज था. यह ब्रिज पर्यटन के दृष्टिकोण से भी तमिलनाडु के लिए बहुत खास हैं. (नीचे भी पढ़ें)
रेलवे ने ब्रिज को घोषित किया जर्जर- रामेश्वरम-पमबन ब्रिज के पास में एक नया पमबन ब्रिज बन रहा है. दक्षिण रेलवे के अनुसार, यह ब्रिज मार्च 2023 तक बनकर तैयार हो जाएगा. नये बनने वाला ब्रिज देश का पहला वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज है. ब्रिज का 72.5 मीटर का हिस्सा (स्पैन) अपने दोनों तरफ लगी लिफ़्टों के माध्यम से ऊपर की ओर इतना उठ जाएगा कि उसके नीचे से समुद्री जहाज गुज़र सकेंगे. यह इंजीनयरिंग का एक नायाब नमूना है. पुराने रामेश्वरम पमबम ब्रिज को बीच से खोलने के लिए दोनों तरफ 16-16 व्यक्तियों खड़े होकर हाथों से स्ट्रिंग रोलिंग मशीन चलानी पड़ती थी, लेकिन अब यह ऑटोमैटिक लिफ्ट मशीन से खुल जाएगा. 147 पिलर पर पुरानी पमबन ब्रिज खड़ी है, वहीं नई ब्रिज 101 पिलर पर बनाया गया है. 1964 में आए साइक्लोन के कारण पमबन ब्रिज क्षतिग्रस्त हो गया था. हालांकि मरम्मत के बाद इसे फिर से शुरू किया गया है पर ट्रेन की रफ्तार को कम कर दिया गया. नये पुल पर ट्रेन 80 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ेगी.




