सरायकेला/ आदित्यपुर: अखंड सौभाग्य की कामना के लिए महिलाओं ने वट सावित्री की पूजा की. सरायकेला, आदित्यपुर, राजनगर, खरसावां, कुचाई व आस पास के गांवों में शुक्रवार को महिलाओं ने भक्ति व श्रद्धा के साथ वट- सावित्री की पूजा करते हुए अपने पति की दीर्घायु की कामना की. जानकारी हो कि जेष्ट कृष्ण पक्ष के त्रयोदशी को विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए वट-सावित्री की पूजा करतीं हैं.(नीचे भी पढे)

महिलाएं सामूहिक रूप से वट वृक्ष के नीचे पूजा- अर्चना करती हैं. हिंदू शास्त्र के अनुसार वट वृक्ष अमरत्व का प्रतीक माना जाता है. पूजा के दिन वट वृक्ष के नीचे मिट्टी से सावित्री, सत्यवान व यमराज की प्रतिमा स्थापित कर पूजा- अर्चना की जाती है. महिलाएं वट वृक्ष की जड़ में एक लोटा जल चढ़ाकर हल्दी- रोली लगाने के बाद फल- फूल, धूप- दीप आदि से पूजा करती है. इसके बाद महिलाएं हाथ में कच्चा सूत लेकर वट वृक्ष का बारह बार परिक्रमा करती हैं. प्रत्येक परिक्रमा पूरी करने पर महिलाएं फल चढ़ाती हैं. बारह परिक्रमा पूरी करने पर महिलाएं सावित्री- सत्यवान की कथा सुनती हैं. कथा समाप्ति के बाद महिलाएं पति के पांव धोकर उस पानी के साथ प्रसाद ग्रहण करती हैं.(नीचे भी पढ़े)
पति की लम्बी उम्र की कामना की
सुहागिनों ने पति की लम्बी उम्र और सुख शांति के लिए वट वृक्ष की पूजा की. नव विवाहिताओं में वट सावित्री पूजा को लेकर खास उत्साह देखने को मिला. वट वृक्ष को आम, लीची मौसमी फल अर्पित करने, कच्चे सूत से बांधने और हाथ पंखे से ठंडक पहुंचाने के बाद महिलाओं ने आस्था के साथ इसकी परिक्रमा की. पूजा के बाद वट सावित्री कथा भी सुनी जाती है..(नीचे भी पढे)
व्रत से जुड़ीं मान्यताएं
ज्येष्ठ अमावस्या तिथि को हिन्दू महिलाएं वट सावित्री का व्रत रखती हैं. शास्त्रों के अनुसार इस दिन व्रत रखकर वट वृक्ष के नीचे सावित्री, सत्यवान और यमराज की पूजा करने से पति की आयु लंबी होती है और संतान सुख प्राप्त होता है. मान्यता यह भी है कि इसी दिन सावित्री ने यमराज के चुंगल से अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की थी. उसी दिन से यह पर्व चलन में आया..(नीचे भी पढे)
बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु व महेश का वास माना जाता है
पुरानी मान्यता के अनुसार, बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु व महेश का वास माना जाता है. इसलिए लोग वर्षों से इसे देव वृक्ष मानते आ रहे हैं. लोगो का मानना है कि इस वट वृक्ष के पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. महिलाओं ने बांस की टोकरी में सप्त धान, गेहूं, चावल, तेल, कांगनी समेत अन्य सामाग्री लेकर वट वृक्ष के नीचे बैठ कर पहले ब्रह्मा सावित्री और फिर सत्यवान सावित्री की पूजा की.



