
जमशेदपुर : जमशेदपुर के मानगो उलीडीह में पारम्परिक ग्राम सभा उलीडीह द्वारा आदिवासी जन कल्याण समिति मध्य विद्यालय मैदान में विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया. इस कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्व डीआईजी राजीव रंजन द्वारा किया गया. उन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिवस आदिवासी के जल जंगल जमीन पर स्वामित्व के अधिकारो तथा संविधान प्रदत्त उनके मौलिक अधिकारों की सुरक्षा तथा आदिवासी समाज का सर्वागीण विकास सुनिश्चित करने के लिए मनाया जाता है. उन्होंने कहा आज आदिवासी समाज के सामने कई चुनौतियां है. अपने अस्तित्व को बचाने के लिए समाज को शिक्षित एवं जागरूक होना होगा, नशापान से अपने भावी पीढ़ियों को बचाना होगा. उलीडीह ग्राम सभा के मुण्डा अशोक बिरुवा ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों का प्रशासन एवं नियंत्रण पांचवी अनुसूची के प्रावधानों के अनुसार होने के कारण अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत राज व्यवस्था तथा नागर पालिका के प्रावधान लागू नहीं होते हैं. चूंकि नगरपालिका सामान्य क्षेत्रों के प्रशासन एवं नियंत्रण के लिए बनाई गयी है तथा संविधान का अनुच्छेद 243 (जेड ए) अनुसूचित क्षेत्रों पर इसके विस्तार पर रोक लगाती है तथा अनुसूचित क्षेत्रों पर इसका विस्तार के लिए संसद ने अब तक कोई विधि यहीं बनायी है और ना ही अनुसूचित क्षेत्रों में नगर पालिका के प्रावधानों को लागू करने के लिए संविधान अनुच्छेद 243 (जेडए) के तहत राज्य विर्वाचन आयोग का विस्तार किया गया है. (नीचे भी पढ़ें)
ग्राम मुंडा अशोक बिरुवा ने अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायती राज व्यवस्था के प्रावधानों का विस्तार असंवैधानिक है चूंकि अनुसूचित क्षेत्रों में संसद का पेसा कानून 1996 लागू है. संविधान विशेषज्ञ सुरेश चंद्र सोय ने बताया कि आजादी से पूर्व आदिवासी समाज कमी भी अग्रेजों का गुलाम राज्य नहीं था बल्कि स्वतंत्र ग्राम गणराज्य के रुप में अवस्तिव था. आजादी के 75 वर्षों में आदिवासी समाज के लोगों द्वारा संविधान से अनभिज्ञ अदूरदर्भी सत्ता पद धन लोलुप भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों को चुने जाने के कारण लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा में मौलिक अधिकारों को छीनने के कराण अनुसूचित क्षेत्रों में दूसरे राज्यों के निवासियों का प्रवेश बढ़ गया है तथा विधायक सांसद द्वारा इन निवासियों के हित सवर्घन हेतु कानून बनाने के कारण अनुसूचित क्षेत्रों में लगातार कमी आ रही है. आदिवासी समाज संविधानिक अधिकारों से बेदखल हो रहे है. यही स्थिति बनी रही तो अयोग्य, भ्रष्ट, सत्ता-पद, जनप्रतिनिधि चुनकर जीतते रहेंगे और दूसरे राज्यों के निवासियों का प्रवेश लगातार होता रहेंगा तो आदिवासी समाज आजादी से गुलामी की ओर बढ़ेगा. इस बैठक में ग्राम विकास समिति उलीडीह के अध्यक्ष रामसिंह बिरूवा, जीरन पूर्ति, शांति वानरा, सुन्दरी कालुंडिया, सुनिता अग्रसुष्डी, शेश्नी बोयापाई, सीनी बिरूली, रंजना हेम्ब्रोम, तुरेश गोप, गुलशन गोप, पप्पु शंख, हरिश तामसोय, हरिचरण सोय, छोटे बहादूर, सिद्ध दोगों, कितौन कालेन्द्रि, आषीश उग्रसुन्डी, करन उग्रसुन्डी, रविन्द्र गोड़ समेत अन्य समस्य उपस्थित थे.




