शार्प भारत डेस्क : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के ऐतिहासिक तीसरे चंद्र मिशन के तहत चंद्रयान के चंद्रमा की सतर पर उतरते ही भारत ने 23 अगस्त 2023 को इतिहास रच दिया है. वहीं इस मिशन में भारत के विभिन्न हिस्सों से महिलाओं की अहम भुमिका है. चंद्रयान 3 के मिशन को पूर्ण करने में वैज्ञानिक ऋतु करिधाल, अनुराधा टीके, बी वलारमति, मंगला मणि, मोमिता दत्ता, नंदनी हरिनाथ, मिनाक्षी संपूर्णेसवरी, किर्ती फौजदार, टेसी थॉमस शामिल है. (नीचे भी पढ़ें)

वैज्ञानिक ऋतु करिधाल – इसरो की वैज्ञानिक ऋतु चंद्रयान 3 मिशन की डायरेक्टर है. इससे पहले वे मार्स आर्बिटर मिशन की डिप्युटी आपरेटर डायरेक्टर थी. उन्हें रॉकेट वूमन के नाम से भी जाना जाता है. उन्होंने वैज्ञानिक के साथ साथ घर की भी जिम्मेदारी संभाली है. वे लखनऊ की रहने वाली है. डॉ. ऋतु करिधाल का जन्म 1975 में लखनऊ के मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था. बचपन से उन्हें चांद-सितारों और आसमान में दिलचस्पी थी. इसरो और नासा से संबंधित समाचार पत्रों के लेख, जानकारी और तस्वीरें इकट्ठा करना उनका शौक था. उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से भौतिकी में बीएससी और एमएससी की पढ़ाई की. फिर एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री लेने के लिए आईआईएससी, बंगलूरू में दाखिला लिया. डॉक्टर करिधाल ने नवंबर 1997 से इंजीनियर के तौर पर इसरो में काम करना शुरू किया. (नीचे भी पढ़ें)

वैज्ञानिक अनुराधा टीके – वैज्ञानिक अनुराधा टीके इसरो के परियोजना निदेशक विशेष संचार उपग्रह है. उन्होंने उपग्रह जीसैट 10 और 12 के प्रक्षेपण पर काम किया है. वह इसरो की सबसे वरिष्ठ महिला वैज्ञानिक है. जो 1982 में अंतरिक्ष एजेंसी में शामिल हुई थी. वे उपग्रह परियोजना निदेशक बनने वाली पहिला महिला था. उनका जन्म 30 अप्रैल 1960 को बैंगलोर के कर्नाटक में हुआ था. उन्होंने बैंगलोर के यूनिवर्सिटी विश्वेश्वरैया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रॉनिक्सा में स्नातक की डिग्री की थी. उन्हें सुमन शर्मा पुरस्कार समेत अन्य कई पुरस्कार मिले है. (नीचे भी पढ़ें)

वैज्ञानिक बी वलारमति – चिफ आफ रडार इमेजिंग सैटलाइट है. वहीं उन्होंने रिमोट सेंसिग सैटलाइट मिशन की चीफ होने की रिकॉर्ड भी बनायी है. (नीचे भी पढ़ें)

वैज्ञानिक मंगला मणि – वैज्ञानिक मंगला मणि 56 साल की है. जो इंडियन रिसर्च टीम अंटार्कटिका 2016 की 23 मेंबर सदस्यों में से एक थी. वे एकलौती महिला थी उस टीम की जिन्होंने 403 दिन तक टिकी थी. (नीचे भी पढ़ें)

वैज्ञानिक मौमिता दत्ता – वैज्ञानिक मौमिता दत्ता एक एमटेक ग्रेजुएट है. जिन्होंने एक्पेरिमेंटल फिजिक्स की पढ़ाई कोलकाता विश्वविद्यालय से की है. मंगलयान मिशन के लिए वे प्रोजेक्ट मैनेजर थी वहीं उन्होंने मेक इन इंडिया के लिए भी काम किया है. (नीचे भी पढ़ें)

वैज्ञानिक नंदिनी हरिनाथ – भारत की महिला वैज्ञानिक हैं. उनका कॅरियर ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ (इसरो) से शुरू हुआ था. जब उन्होंने स्टार ट्रेक सीरिज देखी, तभी से वह विज्ञान के प्रति आकर्षित हो गई थीं. वह एक ऐसे परिवार से आती हैं, जहां पर सभी अध्यापक और इंजीनियर्स हैं. उनका झुकाव हमेशा से ही विज्ञान और प्रौद्योगिकी वाले विषयों के लिए रहा. नंदिनी हरिनाथ मार्स मिशन के साथ बतौर डिप्टी डायरेक्टर जुड़ी हुई हैं. नंदिनी हरिनाथ का अंतरिक्ष विज्ञान से पहला परिचय टेलीविज़न पर साइंस फ़िक्शन “स्टार ट्रेक” से हुआ था. उन्होंने उन दिनों को याद करते हुए कहा था- “मेरी मां गणित की शिक्षक और पिता इंजीनियर हैं. उन्हें भौतिकी से बेहद लगाव है. हम सब एक साथ बैठ कर स्टार ट्रेक देखा करते थे. ” इसरो के पहले नंदिनी हरिनाथ ने अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनने के बारे में नहीं सोचा था. उनका कहना था कि- “यह पहली बार था, जब मैंने नौकरी के लिए आवेदन किया था और मैं पास भी हो गई. इसके बाद मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. ” भारत के मंगल अभियान से जुड़ना नंदिनी हरिनाथ के लिए बड़ी बात थी. (नीचे भी पढ़ें)

वैज्ञानिक मीनाक्षी संपूर्णेसवरी – वैज्ञानिक मीनाक्षी संपूर्णेसवरी इसरो सिस्टम इंजीनियर है. उनका नाम 500 साइस्टिस्ट में से एक है. उनका नाम मंगलयान मिशन के बाद लैमलाइट में आया है. (नीचे भी पढ़ें)

कीर्ति फौजदार – कीर्ति फौजदार एक कंप्यूटर वैज्ञानिक है. उन्होंने उपग्रह को उसकी सही कक्षा में स्थापित करना का काम की है. (नीचे भी पढ़ें)

टेसी थॉमस – अग्नि4 और 5 के सफलता के पीछे की सफलता कका श्रेय टेसी थॉमस को दी जाती है. वे डीआरडीओ के लिए कार्य करती है.



