गालूडीह : महुलिया हाई स्कूल का एक मात्र आदिवासी बालक छात्रावास जर्जर स्थिति में है. छात्रावास के छत का प्लास्टर टूट चुका है. सरिया बाहर निकली है. स्कूली छात्र जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं. जहां हमेशा खतरा बना रहता है. यहां पर रहने वाले बच्चों के लिए सोने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण से बच्चे एक बेड (पलंग) में सोने के लिए मजबूर हैं. बेडशीट, कंबल इत्यादि की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. मेसो परियोजना निधि से आदिवासी बालक छात्रावास का निर्माण सन 2001 में आदिवासी बच्चों के लिए किया गया था, ताकि वे यहां रहकर पढ़ाई कर सके. परंतु विभाग द्वारा ध्यान नहीं देने से छात्रावास का हाल खस्ता हो गया है. (नीचे भी पढ़ें)
छात्रावास का उद्घाटन तत्कालीन विधायक प्रदीप कुमार बलमुचु द्वारा किया गया था. फिलहाल छात्रावास में झाटीझरना के पांच छात्र रह रहे हैं. छात्रों ने बताया कि वे जर्जर छात्रावास में जैसे-तैसे पढ़ाई करते हैं. कई बार पढ़ाई के दौरान छत का प्लास्टर गिर जाता है. घर दूर होने के कारण आना जाना संभव नहीं है. इसलिए मजबूरी में रहना पड़ता है. स्कूल के प्रधानाध्यापक संदीप कुमार पाल ने कहा कि छात्रवास में सभी विद्यार्थी स्वयं अपने खर्चे पर रहते हैं. घर दूर होने के कारण रहने के लिए अनुमति दी गयी है. फिलहाल झाटीझरना गांव के पांच विद्यार्थी रह रहे है. छात्रावास में सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है. बच्चे अपने रिस्क पर रहते हैं. सब नए शिक्षक है, 2019 में आये हैं. अभी तक हैंडओवर भी नहीं किया गया है.




