
जमशेदपुर : टाटा स्टील के मजदूरों के हितरक्षक बनकर करीब 80 कमेटी मेंबरों ने वेज रिवीजन में होने वाली अनियमितताओं को दूर करने को लेकर एक आवेदन दिया था. इसमें यह मांग की गयी थी कि यूनियन के अध्यक्ष और महामंत्री तत्काल वेज रिवीजन पर रिक्वीजिशन मीटिंग बुलाये ताकि मजदूरों की भावनाओं से यूनियन के आला नेताओं को अवगत कराया जा सके और कमेटी मेंबर भी जान सके कि वेज रिवीजन वार्ता में हो क्या रहा है. लेकिन यूनियन के पदाधिकारियों ने ऐसी मीटिंग बुलाने से इनकार कर दिया. नियमत: अगर यूनियन के पदाधिकारी रिक्वीजिशन मीटिंग बुलाने से इनकार कर दें तो रिक्वीजिशन मीटिंग आवेदन देने वाले कमेटी मेंबर खुद से बुला सकते है. पहले रिक्वीजिशन के हस्ताक्षरी कमेटी मेंबर को बुलाने का अधिकार है. इस मामले में आइ-ब्लास्ट फर्नेस के कमेटी मेंबर संजीव तिवारी पहले हस्ताक्षरी थे, लेकिन अब ऐसे कमेटी मेंबर दिख नहीं रहे है. रिक्वीजिशन मीटिंग को लेकर चुप्पी साध लिये है. दुबक गये है. उनकी ओर से चुप्पी साध ली गयी है, जिससे यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या वेज रिवीजन समझौता को लेकर सिर्फ राजनीति चमकाने और मजदूरों में झूठी छवि बनाने के लिए ऐसा किया गया है. ऐसे कमेटी मेंबर वेज रिवीजन समझौता होने जा रहा है, लेकिन मीटिंग क्यों नहीं बुला रहे है. मीटिंग बुलाने से भाग रहे है तो मजदूरों के सवालों का जवाब देना चाहिए. झूठ के सहारे मजदूरों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार इन सारे कमेटी मेंबरों को किसने दिया. अगर भावना के साथ खिलवाड़ नहीं किया तो रिक्वीजिशन मीटिंग या तो बुलाये या बोले कि क्यों नहीं मीटिंग वे लोग खुद बुला रहे है.
यूनियन में पहले कमेटी मेंबरों ने बुलायी है रिक्वीजिशन मीटिंग
टाटा वर्कर्स यूनियन में यह कोई पहला मौका नहीं है कि कमेटी मेंबरों ने आपात स्थिति या किसी विशेष मुद्दे पर रिक्वीजिशन मीटिंग बुलायी है. इससे पहले रिक्वीजिशन मीटिंग पीएन सिंह के कार्यकाल में बुलायी गयी थी. पीएन सिंह व उनकी टीम ने जब मीटिंग नहीं बुलायी थी, तब कमेटी मेंबर गुलाम मोइनुद्दीन ने इसके लिए पहल करते हुए खुद से रिक्वीजिश़ मीटिंग बुलायी थी.


