जमशेदपुर: सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने कृषि उत्पादन बाजार समिति परसुडीह की दुकानों को चुनाव तैयारी हेतु खाली कराने के जिला प्रशासन के मौखिक निर्देश पर चिंता व्यक्त करते हुए विरोध जताया है. चैंबर के उपाध्यक्ष (व्यापार एवं वाणिज्य) अनिल मोदी द्वारा जिला उपायुक्त को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि इस निर्णय से पूरे क्षेत्र के व्यापार पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा और व्यापारियों को आर्थिक क्षति होगी. मोदी ने कहा कि बाजार समिति परिसर पहले से ही स्थान की कमी का सामना कर रहा है और व्यापारी सीमित जगह में अपनी दुकानें चला रहे हैं. ऐसे समय जब त्योहारों का मौसम चल रहा है और आगामी दिसंबर में झारखंड का महत्वपूर्ण महापर्व टुसू आने वाला है. इस पर्व हेतु व्यापारी पहले से माल मंगवाकर रखते है. ऐसे में दुकानों एवं गोदामों को खाली करवाना व्यापारियों की आजीविका पर प्रतिकूल असर डालेगा. (नीचे भी पढ़ें)
पत्र में अनिल मोदी ने यह भी बताया कि इस विषय पर पहले फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से राज्य सरकार एवं अन्य के खिलाफ दायर मुकदमे में झारखंड उच्च न्यायालय ने 2017 में स्पष्ट रूप से चुनावी कार्य हेतु आवश्यक भूमि पूर्व से चिन्हित कर इसका आवंटन करवाने का उल्लेख किया था तथा कहा था कि इसके लिए बाजार समिति, व्यावसायिक दुकानों और गोदामों को लंबे समय तक प्रशासनिक कब्जे में रखना उचित नहीं. मोदी ने कोर्ट के एक अन्य प्रकरण मेसर्स भदानी ट्रेडर्स बनाम झारखंड सरकार का भी उल्लेख किया जिसमें न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उच्च न्यायालय रांची खंडपीठ की टिप्पणियों के बावजूद अधिकारियों ने एक बार फिर पुराने तरीकों का सहारा लेते हुए बाजार समिति में चालू दुकानों को लेने का कार्य किया है. (नीचे भी पढ़ें)
मोदी ने जिला प्रशासन को सुझाव दिया है कि चुनाव तैयारी के लिए कई सरकारी इमारतें उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग इस कार्य हेतु किया जा सकता है. इनमें प्रमुख रूप से उत्तरी घाघीडीह पंचायत भवन के पास स्थित वेयरहाउस, सदर अस्पताल परिसर के पीछे भवन, श्यामा प्रसाद महाविद्यालय, एलबीएसएम कॉलेज परिसर शामिल है. इन स्थानों को प्रशासनिक दृष्टि से सुविधाजनक बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे निर्वाचन कार्य भी प्रभावित नहीं होगा और स्थानीय व्यापारियों की रोज़ी-रोटी भी सुरक्षित रहेगी. उन्होंने प्रशासन से पुनर्विचार की अपील करते हुए आशा व्यक्त की कि जिला प्रशासन व्यापारियों की कठिनाइयों को समझते हुए वैकल्पिक व्यवस्था करेगा.



