जमशेदपुर : टाटा स्टील के कर्मचारियों को हायर पेंशन स्कीम इपीएस 95 का लाभ मिलने लगा है. कई कर्मचारियों के एकाउंट में बढ़ी हुई पेंशन की राशि पहुंचने लगी है. कई कर्मी थे जिन्हें 3 हजार रुपये पेंशन मिलती थी, उन्हें 30 हजार रुपये तक पेंशन मिलने लगी है.जिन कर्मचारियों के आवेदन को मंजूरी दी गयी है, उनको एरियर की राशि भी दी गयी है, जो जमा किये गये डिमांड नोट की राशि से काफी ज्यादा है. जमशेदपुर के इपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, टाटा स्टील के 5200 में से 1400 कर्मचारियों ने हायर पेंशन स्कीम इपीएस 95 के लिए आवेदन किये हैं. इनमें से 1100 कर्मचारियों को विभाग की ओर से डिमांड नोट दिया जा चुका है. डिमांड नोट के तहत ही पेंशन का दावा करने वाले कर्मचारी को बकाया राशि देनी होगी. इसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी होगी. 1100 कर्मचारियों में से 400 कर्मचारियों ने डिमांड नोट का पैसा जमा कर दिया है. 400 में से 250 लोगों का पैसा इपीएफओ के एकाउंट में आ चुका है, जिसमें से 150 लोगों की फाइनल राशि भेजी जा चुकी है. बताया जाता है कि हायर पेंशन स्कीम का लाभ 150 लोगों को मिल चुका है, जिसमें जितना डिमांड नोट के तहत पैसे जमा किये गये हैं, उससे ज्यादा पैसा मिल रहा है और हर माह रिटायर होने वाले कर्मचारियों को हायर पेंशन के तहत दस गुनी पेंशन राशि मिलने लगी है. गौरतलब है कि टाटा स्टील के कर्मचारियों को इपीएस 95 का लाभ देने से इपीएफओ ने इनकार कर दिया था. लेकिन, बाद में टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु के स्तर पर पहले केंद्र सरकार और फिर इपीएफओ कमिश्नर उपेंद्र प्रताप सिंह के साथ लगातार हुई वार्ता के बाद इसको मंजूरी मिली, जिसका लाभ अब लोगों को मिलने लगा है. (नीचे भी पढ़ें)
क्या है इपीएस 95
आमतौर पर कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और डीए (महंगाई भत्ता) का 12 फीसदी हिस्सा इपीएफ में जमा करता है. उतना ही योगदान एंप्लॉयर भी करता है. लेकिन, एंप्लॉयर के कंट्रीब्यूशन का एक हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना (इपीएस) में जाता है. अभी तक पेंशन की गणना अधिकतम 15 हजार रुपये की सैलरी पर ही होती थी. लेकिन अब सरकार ने यह सुविधा दी है कि कर्मचारी चाहें तो अपनी पूरी सैलरी के आधार पर ज्यादा योगदान कर सकते हैं. ऐसा करने पर इपीएफ और इपीएस दोनों में ही कंट्रीब्यूशन बढ़ेगा. इपीएफ में ज्यादा योगदान करने का फायदा रिटायरमेंट के बाद मिलेगा. अगर आपका योगदान 15,000 रुपये की लिमिट की जगह पूरी सैलरी पर होगा, तो रिटायरमेंट पर मिलने वाला इपीएफ अमाउंट और पेंशन की रकम, दोनों अधिक होंगी.
हायर पेंशन के लिए आवेदन करने का तरीका और सावधानी :
जो कर्मचारी 1 सितंबर 2014 से पहले इपीएफ में शामिल हुए थे, वे एंप्लॉयर के साथ मिलकर जॉइंट ऑप्शन फॉर्म जमा कर सकते हैं. इससे इपीएस के लिए होने वाला कंट्रीब्यूशन भी आपकी असली सैलरी पर होगा, जिससे पेंशन काफी बढ़ सकती है. ऐसा करते समय इपीएफओ की समय-समय पर जारी होने वाली डेडलाइन को ध्यान में रखना जरूरी है. इपीएफ में ज्यादा कंट्रीब्यूशन का फैसला करने से पहले यह समझ लें कि ऐसा करने पर आपकी सैलरी में से ज्यादा कटौती होगी. इससे आपकी टेक-होम सैलरी यानी हाथ में आने वाला वेतन कम हो जायेगा. साथ ही इपीएफ एक लंबी अवधि वाली स्कीम है, जिसमें पैसे निकालने पर लिमिट लागू होती है इसलिए कंट्रीब्यूशन बढ़ाने से पहले अपनी उम्र, आमदनी और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना भी जरूरी है.



