नयी दिल्ली / रांची: अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से हॉर्मुज जलमार्ग के रास्ते गैस सप्लाई ठप हो गई है. इसके चलते देश में घरेलू गैस की किल्लत हो रही है. दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों ने कॉमर्शियल गैस की सप्लाई पर रोक लगा दी है. गैस सप्लाई बंद होने की वजह से कई शहरों में रेस्टोरेंट्स और होटल बंद होने की नौबत आ गई है. इधर, केंद्र सरकार ने गैस समेत जरूरी चीजों की जमाखोरी रोक ने लिए देशभर में ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ लागू कर दिया है. छोटे होटल और भोजनालय चलाने वाले कारोबारियों ने सरकार से सप्लाई बहाल करने की मांग की है.भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना है. ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है. ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है. खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा.(नीचे भी पढ़े)
दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20 फीसदी हिस्सा यहीं से गुजरता है. सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं. भारत अपनी जरूरत का 50 फीसदी कच्चा तेल और 54फीसदी एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है. ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है. इधर झारखंड कीसराजधानी रांची में इंडियन ऑयल से जुड़ी गैस एजेंसियों के माध्यम से रोजाना 150 से लेकर 1000 तक कॉमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति होती है. औसतन 500 सिलिंडर प्रतिदिन के हिसाब से केवल एक कंपनी की आपूर्ति लगभग 2.25 लाख सिलिंडरों के रोटेशन पर आधारित होती है, जो ग्राहकों तक पहुंचायी जाती है. इसी तरह भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और अन्य तेल कंपनियां भी गैस की सप्लाई करती हैं. फिलहाल एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए गैस वितरण किया जाए. रसोई गैस की किल्लत की अफवाहों के बीच राजधानी रांची में कॉमर्शियल सिलिंडरों की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है. कई जगहों पर सिलिंडर सरकारी दर से कहीं अधिक कीमत पर उपलब्ध कराये जा रहे हैं. गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि वास्तविक समस्या गैस की कमी नहीं, बल्कि पैनिक बुकिंग है. मिडिल ईस्ट संकट की खबरों के बाद लोगों ने घबराहट में अधिक मात्रा में सिलिंडर बुक कराना शुरू कर दिया है. पहले जहां रोजाना 350 से 400 घरेलू सिलिंडरों की बुकिंग होती थी, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 2300 से 2500 तक पहुंच गयी है. इतनी बड़ी संख्या में बुकिंग होने से गैस एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है. एजेंसी के अनुसार, इतनी मांग को पूरा करने के लिए दो की जगह आठ वाहनों से सिलिंडर की आपूर्ति करनी होगी, जो फिलहाल संभव नहीं है. इसी कारण कॉमर्शियल सिलिंडरों की सप्लाई सीमित कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है.(नीचे भी पढ़े)
क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम
एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 एक ऐसा कानून है, जो सरकार को यह ताकत देता है कि वह किसी भी जरूरी चीज जैसे- अनाज, दालें, खाने का तेल, दवाइयां या ईंधन की सप्लाई और कीमतों को कंट्रोल कर सके. इसे ‘जमाखोरी रोकने वाला कानून’ कह सकते हैं.अब कभी किसी चीज की कमी होने लगती है या उसकी कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ने लगती हैं, तो सरकार इस कानून को लागू कर देती है. इसके तहत व्यापारियों के लिए स्टॉक की एक लिमिट तय कर दी जाती है कि वे एक सीमा से ज्यादा सामान गोदामों में नहीं भर सकते.







