जमशेदपुर: टाटा स्टील मेरामण्डली वर्कर्स यूनियन ने असनबनीआ गांव में मजदूर दिवस मनाया. असनबनीआ गांव उन लोगो का गांव है, जिन्होंने टाटा स्टील मेरामण्डली (पूर्व में भूषण स्टील ) को अपने जमीन दिए थे. मजदूर दिवस के दिन उन गांव वालों के साथ समय बिताये और उनके दान और बलिदान के लिए धन्यवाद दिया. ये उन गांव वालो के दिए हुए जमीन का नतीजा है कि आज टाटा स्टील मेरामण्डली यहां तक पंहुचा है.कार्यक्रम की शुरुआत यूनियन अध्यक्ष सामल बाबू के द्वारा झंडातोलन से किया गया. (नीचे भी पढ़े)
कार्यक्रम में मुख्य रूप से यूनियन अध्क्षय बिक्रम सिंह सुभ्रांशु शेखर सामल (सामल बाबू), उपाध्यक्ष राजीव रंजन, महासचिव देबाशीष प्रधान, कोषाध्यक्ष दिव्यरंजन साहू और संगठन सेक्रेटरी सरोज लेंका उपस्थित थे. कार्यक्रम को सफल बनाने में शशांक सेट्टी, तापस लेंका, सुभाष बिस्वाल, सत्यकाम भट्टाचार्या, बाबलू और गांव वालों का अहम् योगदान रहा. कार्यक्रम में करीब 250 लोगों ने शिरकत की. कार्यक्रम में यूनियन के द्वारा आगे के रणनीति को लेकर विशेष रूप से चर्चा हुई. यूनियन ने कर्मचारियों से एकता बनाये रखने की अपील की. (नीचे भी पढ़े)

यूनियन ने प्रोडक्शन और प्रोडक्टिविटी बढाने पर जोर दिया गया. यूनियन ने कंपनी के बढ़ोतरी के साथ साथ कर्मचारियों की भी सामानांतर बढ़ोतरी की उम्मीद जताई.अध्यक्ष ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह एक सतत संघर्ष और जागरूकता का प्रतीक है. यह हमें उन लाखों-करोड़ों श्रमिकों के योगदान को सम्मान देने का अवसर देता है, जो दिन-रात मेहनत करके समाज और देश को आगे बढ़ाते हैं.(नीचे भी पढ़े)
आज जरूरत है कि हम न सिर्फ इस दिन को मनाएं, बल्कि श्रमिकों के अधिकारों और उनके कल्याण के लिए ठोस कदम भी उठाएं. जब तक हर श्रमिक को उसका हक और सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक विकास अधूरा रहेगा. मजदूर दिवस हमें यही संदेश देता है कि एक न्यायपूर्ण और समान समाज के निर्माण के लिए श्रमिकों की भलाई सर्वोपरि होनी चाहिए.(नीचे भी पढ़े)
आज भारत में मजदूर दिवस का विशेष महत्व है, क्योंकि देश की एक बड़ी आबादी श्रमिक वर्ग से जुड़ी है. चाहे वह खेतों में काम करने वाले किसान हों, निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूर, फैक्ट्री वर्कर्स या फिर असंगठित क्षेत्र के कर्मचारी सभी देश की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभाते हैं.






