रामगोपाल जेना/चाईबासा : चाईबासा में नो इंट्री की समस्या इतनी भी बड़ी नहीं है कि उसका समाधान ना हो सके, लेकिन सरकार और प्रशासन की संवादहीनता और संवेदनहीनता के कारण मामला लगातार तूल पकड़ रहा. इस समस्या का समाधान नहीं हो रहा है. उक्त बातें नो इंट्री आंदोलन समिति कोल्हान के संयोजक रमेश बलमुचु ने पदयात्रा से लौटने के बाद शनिवार को कहीं. श्री बलमुचु ने कहा कि वह चाईबासा की जनता के साथ चाईबासा के बाईपास एमडीआर 177 में सुबह से रात तक भारी वाहनो का पूर्णतः नो इंट्री लगाने की मांग को लेकर 26 अप्रैल से न्याय पदयात्रा में थे. वह सभी अपनी पीड़ा को बताने के लिए पांच दिन लगातार पैदल चल कर शुक्रवार को रांची पहुंचे. लेकिन किसी ने पदयात्रा कर रहे इन अदिवासियो और ग्रामीणों की पीड़ा सुनने और इसका हल निकालने का प्रयास नहीं किया. शुक्रवार की शाम को लगभग 4 बजे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास के समीप चाईबासा की जनता के साथ पहुंचे. किसी भी प्रकार की वार्ता नहीं होने के कारण चाईबासा की जनता खाली हाथ वापस अपने घर लौट आई. अब जल्द ही चाईबासा के ग्रामीण एवं भुक्तभोगी के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तैयार करेंगे. (नीचे भी पढ़ें)

लोकतांत्रिक तरीके से की गई न्याय पदयात्रा
रमेश बलमुचु ने बताया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्शों पर चाईबासा में नो एंट्री की मांग लोकतांत्रिक तरीके से 26 अप्रैल को शुरू की गई. पांचवें दिन 1 में को मुख्यमंत्री आवास के समीप पहुंचा. इस दौरान रास्ते में किसी भी प्रकार की कोई अप्रिय घटना घटित नहीं हुई. सभी शांतिपूर्ण तरीके से मुख्यमंत्री आवास के समीप पहुंचकर अपनी बातों को रखने के लिए एकत्र हुए. साथ ही पूर्व में लिखित दिए आवेदन के आधार पर मुख्यमंत्री से अपनी बातों को रखने अथवा उनके प्रतिनिधि के साथ वार्ता कर चाईबासा की जनता का दुख दर्द बांटने का अनुरोध किया गया, लेकिन राज्य सरकार और जिला प्रशासन संवेदनहीन होने के कारण किसी भी प्रकार का कोई वार्ता नहीं हो पाया। जो कि काफी गंभीर मामला है। सरकार को जनता के किसी भी समस्या से कोई लेना-देना नहीं है. इतनी कठिनाइयों और दूरी से पैदल आने के बाद भी राज्य सरकार के कोई आला अधिकारी या मंत्री सुध लेने का कोई मुनासिब नहीं समझा। काफी शर्म की बात है. (नीचे भी पढ़ें)

प्रशासन ने लोगों को रोका नो इंट्री आंदोलन में रांची जाने से
श्री बलमुचु ने बताया कि शुक्रवार की अहले सुबह 3 बजे से जिले के वैसे मार्ग जो रांची की ओर जाते हैं, उक्त सभी मार्गों के चौक चौराहों पर पश्चिम सिंहभूम जिला पुलिस प्रशासन द्वारा काफी संख्या में पुलिस पदाधिकारी एवं जवान तैनात किए गए थे, जो रांची की ओर जाने वाली सभी बसें एवं वाहनों को रोक रहे थे. नो इंट्री आंदोलन समिति के आह्वान पर आयोजित न्याय पदयात्रा में शामिल होने वाले लोगों को पुलिस प्रशासन द्वारा जबरन पड़कर थाना ले जाया गया एवं उनके द्वारा प्रयोग में ले जाने वाली बसें एवं छोटी वाहनों को जब्त कर लिया गया.
सीएम से लेकर सभी डीसी को दी गई थी सूचना
चाईबासा में बाइपास एमडीआर 177 में सुबह से रात तक भारी वाहनो का पूर्णतः नो इंट्री लगाने की मांग को लेकर 26 अप्रैल से चाईबासा से रांची के लिया न्याय पद यात्रा निकली गई थी। अंतिम दिन 1 मई को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ज्ञापन सौंपनी थी. इसके लिए आवश्यक अनुमति/सुरक्षा व्यवस्था की मांग की गई थी. साथ ही पश्चिमी सिंहभूम उपायुक्त को पत्र लिख कर 09 अप्रैल को, रांची डीसी को 10 अप्रैल, खूंटी डीसी को 10 अप्रैल और मुख्यमंत्री के नाम सीएम सचिवालय में भी 10 अप्रैल को लिखित आवेदन देकर सूचित किया गया था. जबकि अनुमंडल पदाधिकारी रांची के द्वारा 30 अप्रैल को कार्यालय कक्ष में बुला कर न्याय पदयात्रा की जानकारी मांगी गई. इसके बाद लिखित आधार पर रांची जिला प्रशासन के बताए मार्ग के लिए आवेदन मांगा गया. जिसे भी लिखित तौर निवेदन किया गया था.






