जमशेदपुर: जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल के मेडिसिन विभाग के कोरिडोर गिरने से तीन मरीजों की मौत मामले को झारखंड मानवाधिकार संगठन जेएचआरसी ने काफ़ी गंभीरता से लिया है. संगठन की एक बैठक केंद्रीय प्रमुख मनोज मिश्रा की अध्यक्षता मे जुबिली पार्क में संपन्न हुई. बैठक ने इस दर्दनाक हादसे के समस्त दोषियों पर आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की गयी है. संगठन प्रमुख मनोज मिश्रा ने बताया कि पूरे मामले को झारखण्ड उच्च न्यायलय एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को उच्च स्तरीय जांच के लिए भेजा जा रहा है. उन्होने कहा कि साकची स्थिति 60 वर्ष पुराने जर्जर अस्पताल बिल्डिंग से डिमना में बने नए अस्पताल भवन मे मरीजों को समय रहते क्यों शिफ्ट नहीं किया जा सका? इस बड़े लापरवाही के कारण तीन निर्दोषों की जान गयी है, इसकी जबाबदेही तय होनी चाहिए. इससे जुड़े दोषियों पर हर हाल मे आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि भवन निर्माण विभाग ने तीन वर्ष पूर्व इसी पुराने बिल्डिंग में रिपेयर का काम किया था, उसके बाद भी उन्होने पुराने बिल्डिंग की जर्ज़र अवस्था को लेकर अबतक कोई कारगर कदम क्यों नहीं उठाया ? क्या उन्होंने पुराने अस्पताल भवन को कंडम घोषित किया था? क्या उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को पुराने भवन की जर्जर एवं बेहद कमजोर स्तिथि की जानकारी या कोई नोटिस जारी किया था ? उन्होने कहा कि अस्पताल के भवनो का शेफटी ऑडिट क्यों नहीं कराया गया? मनोज मिश्रा ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय और जिला प्रशासन के बार बार के निर्देश के बाद भी अस्पताल के मरीजों को क्यों शिफ्ट नहीं किया गया? इसकी जिम्मेवारी किसकी है? नए अस्पताल भवन में पानी की समस्या का समाधान इतने लंबे समय गुजरने के बाद भी क्यों नहीं किया गया, इसमें किसके स्तर पर गंभीर लापरवाही बरती गयी? इन सभी मुद्दों पर उच्च स्तरीय जांच किये जाने की जरूरत है. उन्होने बताया कि अपने नागरिकों को बेहतर ईलाज एवं स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना राज्य का अधिकार क्षेत्र है, ऐसे में गरीबो को ईलाज के बदले मौत परोसा गया जो असहनीय एवं अक्षम्य है. इस पूरे मामले में दोषियों के खिलाफ जबतक कड़ी कार्यवाही नहीं होंगी संगठन शांत नहीं रहेगा. सड़क से न्यायालय तक लम्बी लड़ाई लड़ी जाएगी. आज के बैठक मे मनोज मिश्रा के साथ सालावत महतो, किशोर वर्मा, गुरूमुख सिंह, हरदीप सिद्दू, एस के बसु, जसवंत सिंह, संतोष कुमार एवं अन्य मौजूद थे.



