जमशेदपुर : टाटा स्टील का ट्यूब डिवीजन इस समय गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है. विभाग को स्थिर करने और संचालन लागत (फिक्स्ड कॉस्ट) में कटौती के लिए मैनपावर राइटसाइजिंग यानी कर्मियों की संख्या कम करने की आवश्यकता बतायी जा रही है. इस बीच इस हालात को देखते हए टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन ने ट्यूब बिजनेस काउंसिल का गठन कर दिया है. इसके तहत वाइस प्रेसिडेंट मार्केटिंग व सेल्स फ्लैट प्रोडक्ट प्रभात कुमार को चेयरपर्सन बनाया गया है जबकि वैकल्पिक चेयरपर्सन वाइस प्रेसिडेंट सेफ्टी व हेल्थ व सस्टेनेबिलिटी को बनाया गया है. इस काउंसिल का संयोजक चीफ फाइनांसियल कंट्रोलर ट्यूब सुशील केडिया को बनाया गया है. इस कमेटी में चीफ टेक्नॉलॉजी अवतार सिंह सैनी, खपोली के एक्जीक्यूटिव प्लांट हेड कपिल मोदी, चीफ इंटीग्रेटेड प्लानिंग व सर्विसेज केशरी कुमार, एक्जीक्यूटिव प्लांट हेड मुकेश कुमार, चीफ बिजनेस फाइनांस व एनालिटिक्स प्रदीप कुमार बाल, चीफ बीपीइ ऑपरेशन प्रकाश सिंह, इआइसी ट्यूब संजय सूरज प्रकाश साहनी, चीफ ब स ट्रांस सर्विसेज, डिजिटल व आइटी शिखर सराजीत झा, वीपी ऑपरेशन टाटा स्टील मेरामंडली उत्तम सिंह, चीफ मार्केटिंग व सेल्स विजय कुमार दारा, चीफ आरएंडडी एंड प्रोडक्ट टेक्नॉलॉजी विनय वसंत महाशाब्दे और चीफ ग्रुप एचआर एंड आइआर जुबिन पालिया को सदस्य बनाया गया है. इससे पहले ट्यूब डिवीजन के कार्यकारी निदेशक (इआइसी) संजय साहनी ने टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी, महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह के साथ बैठक की थी. बैठक में यूनियन के ट्यूब डिवीजन प्रभारी उपाध्यक्ष शहनवाज आलम, सहायक सचिव श्याम बाबू, एचआर पदाधिकारी शुभ्रा सिंह और किंकनी दास भी उपस्थित थे. (नीचे भी पढ़ें)
बैठक में एक प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया गया कि ट्यूब डिवीजन कुल एक मिलियन टन उत्पादन कर रहा है, जिसमें जमशेदपुर प्लांट से केवल 25 फीसदी उत्पादन होता है जबकि शेष 75 फीसदी उत्पादन बाहरी एजेंसियों से कराया जा रहा है. इन बाहरी एजेंसियों द्वारा उत्पादित सामग्री पर टाटा स्टील की गुणवत्ता जांच के बाद कंपनी की ब्रांडिंग की जाती है. प्रेजेंटेशन में यह स्पष्ट किया गया कि ट्यूब डिवीजन में आंतरिक उत्पादन की लागत अत्यधिक है, जबकि बाहरी एजेंसियों के जरिये उत्पादन सस्ता और प्रभावी है. ऐसे में कंपनी अपने फिक्स्ड कॉस्ट को घटाने के लिए वेतन और स्टाफ लागत में कटौती पर विचार कर रही है. हालांकि अभी तक यूनियन को मैनपावर कटौती का कोई लिखित प्रस्ताव नहीं सौंपा गया है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही यह प्रस्ताव सामने आ सकता है. इससे पहले यूनियन के कमेटी मेंबरों को यह प्रेजेंटेशन दिखाया जा चुका है.



