रामगोपाल जेना,चाईबासा: झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार रांची के निर्देशानुसार तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष डीएलएसए पश्चिम सिंहभूम मोहम्मद शाकिर के मार्गदर्शन में प्राधिकार के तत्वावधान में 90 दिवसीय विधिक जागरूकता अभियान के अंतर्गत लीगल लिटरेसी संत जेवियर्स विद्यालय
में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान प्राधिकार के सचिव रवि चौधरी ने छात्रों को संबोधित करते हुए उन्हें बाल श्रम और बाल सुरक्षा संबंधित विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी प्रदान की. उन्होंने बताया कि कम उम्र के बच्चों को श्रम संबंधित कार्यों में नियोजित करना न सिर्फ सामाजिक रूप से अस्वीकार्य है बल्कि यह कानूनन अपराध भी है. ऐसे में उनका स्वाभाविक
विकास बाधित होता है और वह मानसिक रूप से भी तैयार नहीं होते और उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. अभी पढ़ने लिखने की और उज्जवल भविष्य के निर्माण के लिए अध्ययन पर ध्यान देने का उचित समय होता है. इसलिए इस तरह की सामाजिक बुराइयों से बचना चाहिए, यदि माता-पिता नियोजक या अभिभावक ऐसा करने को बाध्य करते हैं तो उन्हें समझाना चाहिए ऐसा करने पर यह दंडनीय अपराध है.(नीचे भी पढ़े)
उन्होंने बाल मानव तस्करी के विषय में बताते हुए सचेत किया कि बड़े शहरों में काम मिलने का लोक लुभावना आडंबर दिखाकर बाल तस्कर या मानव तस्कर लोगों को प्रभावित करते हैं. परंतु ज्यादातर उसकी सच्चाई इसके उलट होती है और बड़े शहरों में उनका न सिर्फ शारीरिक औऱ मानसिक शोषण होता है बल्कि आर्थिक रूप से भी उन्हें कोई लाभ नहीं मिल पाता. ऐसे प्रलोभनों के प्रति सावधान रहना चाहिए और यदि कोई ऐसा करे तो उसके विरुद्ध डालसा के टोल फ्री नंबर 15100 पर या चाइल्डलाइन 1098 और पुलिस 100 या 112 पर इसकी सूचना दी जा सकती है. प्राधिकार का सदैव प्रयास होता है कि ऐसे अप्रिय स्थिति को उत्पन्न होने से पहले ही जन जागरूकता के माध्यम से समाप्त किया जा सके.विद्यालय में उन्होंने बालको को बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं से प्रति आगाह करते हुए ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने ट्रैफिक सिग्नलों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सड़क के किनारे लगाए गए ऐसे चिन्ह राहगीरों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत होते हैं जिसका अनुपालन अवश्य करना चाहिए. सड़क में की गई सुरक्षा न सिर्फ आपको बल्कि दूसरों के लिए भी सुरक्षित वातावरण का निर्माण करती है. उन्होंने विद्यालय की शिक्षिकाओं को भी इन अभियान की और प्रावधानों की विस्तृत जानकारी प्रदान की और किसी भी समस्या के लिए प्राधिकार के कार्यालय में संपर्क करने का सलाह प्रदान किया.(नीचे भी पढ़े)
उन्होंने मादक द्रव्यों के सेवन के कानूनी परिणामों (जैसे, एनडीपीएस अधिनियम के तहत) पर प्रकाश डाला और इनसे बचने की सलाह प्रदान की और जानकारी देते हुए कहा कि यह योजना मादक द्रव्यों के सेवन के पीड़ितों, उनके परिवारों और सहायता की आवश्यकता वाले कारावास में बंद व्यक्तियों के लिए तैयार की गई है. इसके तहत कानूनी सेवाएं, परामर्श, पुनर्वास सहायता और समाज में पुनः एकीकरण में सहायता प्रदान किया जाता है. यह योजना जमीनी स्तर पर जागरूकता फैलाने पर केंद्रित है, जैसे और पीड़ितों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता की उपलब्धता को बढ़ावा दिया जाता है. उन्होंने बच्चों को सचेत करते हुए कहा कि बच्चे आजकल फोन, टैबलेट और गेम्स पर बहुत एक्टिव रहते हैं. इसीलिए साइबर फ्रॉड से सावधान रहना जरूरी है. उन्होंने इससे बचने के उपाय भी बताए. उन्होंने फेक लिंक पर ध्यान नहीं देने की जरूरत पर बल दिया. उन्होंने अंत में कहा कि साइबर फ्रॉड से डरना नहीं है, समझदार बनना है. अगर सावधानी रखेंगे तो इंटरनेट सबसे अच्छा दोस्त साबित हो सकता है. इस दौरान विद्यालय के शिक्षक सहित अधिकार मित्र अलकमा रूही अरुण विश्वकर्मा और असीमा चटर्जी भी उपस्थित थीं.








