जमशेदपुर : गोलमुरी शिव मंदिर में नारी जागरण समिति द्वारा आयोजित सप्ताह व्यापी संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें एवं अंतिम दिन कथा ने विराम लिया. वृंदावन धाम से पधारे प्रवचनकर्ता अनूपानंद जी महाराज ने कथा की भावपूर्ण एवं भक्तिमय प्रस्तुति की. आज सातवें एवं अंतिम दिन अनूपानंद जी महाराज ने सुदामा चरित, भगवान श्रीकृष्ण एवं सुदामा की मैत्री, भक्त के प्रति भगवान की करुणा, परीक्षित मोक्ष तथा श्रीमद्भागवत कथा की फलश्रुति का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया. उन्होंने बताया कि सुदामा जी के पास सांसारिक संपत्ति नहीं थी, लेकिन उनके पास भगवान के प्रति अटूट प्रेम और निष्कपट भक्ति की अमूल्य संपदा थी. भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बाल सखा सुदामा का जिस प्रेम और आत्मीयता से स्वागत किया, वह संसार के लिए सच्ची मित्रता एवं भक्त वत्सलता का अनुपम उदाहरण है. (नीचे भी पढ़ें)

कथा वाचन के दौरान महाराज जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मनुष्य को जीवन जीने की कला, प्रेम, करुणा, सत्य, धर्म और भक्ति का मार्ग दिखाने वाला दिव्य प्रकाश है. कथा के विराम के अवसर पर आयोजन समिति की ओर से सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों एवं प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सभी लोगों का आभार व्यक्त किया गया. सात दिन तक उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से समाज में सनातन संस्कार, नारी जागरण, धार्मिक चेतना एवं सेवा भावना को बढ़ावा देने का प्रयास किया.




