जमशेदपुर : प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ओम प्रकाश रिंगसिया ने झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन की आमसभा से संबंधित समाचारों में ₹25 लाख की राशि के संदर्भ में उनका नाम जोड़ते हुए “गबन” शब्द के प्रयोग पर आपत्ति जताई है. श्री रिंगसिया ने स्पष्ट किया कि वे न तो वर्तमान में झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के कोषाध्यक्ष हैं और न ही पूर्व कार्यसमिति में कोषाध्यक्ष थे. वे प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष हैं. ट्रस्ट के समस्त आय-व्यय का विधिवत ऑडिट होता है तथा प्राप्त प्रत्येक सहयोग राशि पारदर्शी रूप से लेखाबद्ध है. ट्रस्ट की ऑडिट रिपोर्ट पर उनके साथ महामंत्री बसंत कुमार मित्तल एवं अध्यक्ष अजय कुमार मारू के भी हस्ताक्षर हैं. सम्मेलन एवं ट्रस्ट के मध्य ₹25 लाख के लेन-देन का उल्लेख भी ऑडॉ रिपोर्ट में दर्ज है. उन्होंने कहा कि इस विषय में प्रांतीय अध्यक्ष द्वारा भेजे गए पत्रों का ट्रस्ट के महामंत्री बसंत कुमार मित्तल द्वारा समय-समय पर उत्तर दिया गया है. उन उत्तरों में न तो सम्मेलन को कार्यालय उपलब्ध कराने से इनकार किया गया है और न ही ₹25 लाख की राशि सम्मेलन से ट्रस्ट को हस्तांतरित होने के तथ्य से. (नीचे भी पढ़ें)
श्री रिंगसिया ने कहा कि झारखंड गठन के बाद से सम्मेलन का अपना स्थायी कार्यालय बनाने की इच्छा लंबे समय से रही है. बसंत कुमार मित्तल के कार्यकाल में इस संकल्प को मूर्त रूप मिला और आज हरमू, रांची में लगभग 2000 + 1600 वर्गफीट का परिसर उपलब्ध है. ट्रस्ट गठन के समय प्रकाशित बुकलेट में भी स्पष्ट किया गया था कि लगभग 2000 वर्गफीट क्षेत्र झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के कार्यालय तथा शेष लगभग 1600 वर्गफीट ट्रस्ट, शिक्षा बोर्ड, कल्याण बोर्ड एवं अन्य सामाजिक गतिविधियों के उपयोग हेतु रहेगा. उन्होंने कहा कि चुनाव में हार-जीत के कारण मनभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्हें सामाजिक कटुता में नहीं बदलना चाहिए. प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल, बसंत कुमार मित्तल, ट्रस्ट अध्यक्ष एवं पूर्व राज्यसभा सांसद अजय कुमार मारू, संरक्षक विनय कुमार सरावगी तथा महेश पोद्दार जैसे अनुभवी समाजसेवियों की उपस्थिति में संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जा सकता है. (नीचे भी पढ़ें)
रिंगसिया ने आमसभा में उपस्थित एक जिला अध्यक्ष द्वारा जमशेदपुर लौट कर समाचार-पत्रों में ₹25 लाख के संदर्भ में “गबन” जैसे गंभीर शब्द के कथित प्रयोग पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि इसके समर्थन में कोई तथ्य अथवा दस्तावेज उपलब्ध नहीं है तो ऐसे वक्तव्य का स्पष्ट खंडन किया जाना चाहिए. उन्होंने प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल से प्रकाशित समाचार का संज्ञान लेने, संबंधित जिला अध्यक्ष से “गबन” शब्द के प्रयोग का तथ्यात्मक एवं दस्तावेजी आधार पूछने तथा विषय को अनुशासन समिति के समक्ष रखने का आग्रह किया है. रिंगसिया ने कहा, “मेरा उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि संस्था की गरिमा, मर्यादा और आपसी विश्वास बनाए रखना है. संवाद के माध्यम से सम्मानजनक एवं सर्वस्वीकार्य समाधान निकाला जाना चाहिए.”







