जमशेदपुर : झारखंड में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने नई पहल शुरू की है. स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि बेंगलुरु, केरल और तमिलनाडु से विशेषज्ञ चिकित्सकों को झारखंड में सेवा देने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें संबंधित राज्यों में जाकर डॉक्टरों से संपर्क कर रही हैं. मंगलवार को जमशेदपुर स्थित सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि दक्षिण भारत के कई राज्यों में विशेषज्ञ डॉक्टरों को झारखंड की तुलना में कम वेतन मिलता है. ऐसे में राज्य सरकार विशेषज्ञ चिकित्सकों को आकर्षित करने के लिए बेहतर वेतनमान उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है. उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुसार एक विशेषज्ञ डॉक्टर को तीन लाख रुपये प्रतिमाह तक वेतन देने के लिए सरकार तैयार है. मंत्री ने कहा कि सरकार की योजना जमशेदपुर को एक बड़े मेडिकल हब के रूप में विकसित करने की है. (नीचे देखे पूरी खबर)

इसके लिए केवल अस्पतालों के भवन और अत्याधुनिक मशीनें ही नहीं, बल्कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता, मेडिकल शिक्षा का विस्तार, आधुनिक जांच सुविधाएं, डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने पर एक साथ काम किया जा रहा है. स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के विस्तार के लिए करीब 600 करोड़ रुपये की योजना बनाई गई है. इसमें से 400 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं. विस्तार योजना पूरी होने के बाद पीजी की सीटों की संख्या बढ़ाकर 150 और एमबीबीएस की सीटें 250 तक करने का लक्ष्य है. उन्होंने कहा कि रिम्स रांची के साथ-साथ राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी सीटें बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है. मेडिकल शिक्षा के विस्तार से आने वाले वर्षों में राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है. एमजीएम अस्पताल में फिलहाल केवल एक वेंटिलेटर संचालित होने की जानकारी पर स्वास्थ्य मंत्री ने चिंता जताई. (नीचे देखे पूरी खबर)

उन्होंने कहा कि इस संबंध में उनकी उपायुक्त से बातचीत हुई है और वह स्वयं रांची जाकर मामले की स्थिति की समीक्षा करेंगे. मंत्री ने बताया कि एमजीएम प्रबंधन की ओर से स्वास्थ्य विभाग को 50 वेंटिलेटर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भेजा गया है. प्रस्ताव पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. अस्पताल की खराब लिफ्टों को भी जल्द दुरुस्त कराने की बात उन्होंने कही. एमजीएम अस्पताल में पूर्व में दो मरीजों की मौत के बाद स्वजनों ने डॉक्टरों की लापरवाही और समय पर इलाज नहीं मिलने का आरोप लगाया था. इस मामले पर मंत्री ने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी. जांच में यदि किसी डॉक्टर या अन्य कर्मी की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. एमजीएम और सदर अस्पताल में लगेंगे एमआरआई व सीटी स्कैनस्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल और सदर अस्पताल में जल्द ही एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनें लगाने की तैयारी है. मंत्री ने बताया कि दोनों अस्पतालों में मशीनों की खरीद की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. मशीनें लगने के बाद मरीजों को जांच के लिए निजी केंद्रों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा. खासकर गंभीर मरीजों की समय पर जांच होने से उनका इलाज भी जल्द शुरू किया जा सकेगा. डिजिटल हेल्थ सिस्टम में एआई के इस्तेमाल पर जोरराज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में भी तेजी से काम कर रही है. स्वास्थ्य विभाग और गूगल के बीच हुए एमओयू के तहत झारखंड में डिजिटल हेल्थ सिस्टम विकसित करने की योजना है, जिसे चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में लागू किया जाएगा. इस व्यवस्था में नागरिकों की डिजिटल हेल्थ आईडी, स्वास्थ्य रिकार्ड के सुरक्षित आदान-प्रदान और अस्पतालों तथा स्वास्थ्यकर्मियों की डिजिटल रजिस्ट्री जैसी सुविधाएं शामिल होंगी. सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के उपयोग को भी बढ़ाने की तैयारी कर रही है. जून में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नागरिकों के हेल्थ प्रोफाइल सिस्टम और स्वास्थ्य सेवाओं की डिजिटल मानिटरिंग को मजबूत करने के निर्देश दिए थे. इसके बाद जुलाई में गूगल समेत विभिन्न तकनीकी कंपनियों के साथ एआई आधारित स्मार्ट हेल्थकेयर, आपातकालीन सेवाओं और भाषा आधारित एआई समाधान को लेकर भी चर्चा हुई थी. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जमशेदपुर को मेडिकल हब बनाने की योजना व्यापक है. इसका उद्देश्य सिर्फ नए भवन तैयार करना या मशीनें लगाना नहीं है, बल्कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाना, मेडिकल शिक्षा का विस्तार करना, आधुनिक जांच सुविधाएं विकसित करना और डिजिटल तकनीक के माध्यम से मरीजों को बेहतर एवं त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है.




