जमशेदपुर : अस्पतालों, नर्सिंग होम, पैथोलैब, ब्लड बैंक सहित सभी स्वास्थ्य संस्थानों से निकलने वाला बायोमेडिकल वेस्ट अब सिर्फ कचरा प्रबंधन का विषय नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार से जुड़ा गंभीर सवाल बन गया है. उक्त बातें झारखंड हाई कोर्ट ने बायोमेडिकल वेस्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन को लेकर दिए गए आदेश के आलोक में कहीं हैं. इसी मुद्दे पर झारखण्ड मानवाधिकार सम्मेलन की भुइयांडीह मे अध्यक्ष मनोज मिश्रा की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में अस्पतालीय कचरे से जुड़े हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन की निगरानी करने का निर्णय लिया गया. (नीचे भी पढ़ें)
मनोज मिश्रा ने कहा कि जन निगरानी समिति का विस्तार पूरे जिले में किया जाएगा तथा आम नागरिकों को जन निगरानी समिति से जोड़ा जाएगा. उन्होंने कहा कि समिति यह पता करेगी कि शहर के अस्पतालों और नर्सिंग होम से निकलने वाला बायोमेडिकल वेस्ट कहां और किस व्यवस्था के तहत डिस्पोज किया जा रहा है, संबंधित डिस्पोजल सुविधा वैधानिक रूप से अधिकृत है या नहीं तथा कचरे के परिवहन में लगे कितने वाहन हैं और वे अधिकृत / पंजीकृत हैं या नहीं. (नीचे भी पढ़ें)
हाई कोर्ट ने भी स्वास्थ्य संस्थानों के पास वैध बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन प्राधिकरण तथा अधिकृत कॉमन बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी से जुड़ाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. बायोमेडिकल वेस्ट के संग्रहण और परिवहन में अधिकृत वाहनों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है. जेएचआरसी ने तय किया है कि 30 बेड वाले और उससे कम बेड वाले छोटे संस्थानों की भी निगरानी में रखा जाएगा. जन निगरानी समिति यह भी जांच करेगी कि 30 से अधिक बेड वाले अस्पतालों में बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट कमिटी तथा 30 से कम बेड वाले अस्पतालों/नर्सिंग होम में जिम्मेदार नोडल अधिकारी का गठन / नामांकन हुआ है या नहीं. साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि संबंधित कमेटी या नोडल अधिकारी वास्तव में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं या व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित है. (नीचे भी पढ़ें)
बायोमेडिकल वेस्ट का गलत निस्तारण संक्रमण, मिट्टी और जल प्रदूषण तथा अन्य स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है, इसलिए इसका प्रभाव सीधे अनुच्छेद 21 में निहित जीवन एवं गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार से जुड़ता है. न्यायपालिका ने भी स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त पर्यावरण को जीवन के अधिकार के व्यापक दायरे से जोड़ा है. जन निगरानी समिति मे श्यामलाल, रेणु सिंह, किशोर वर्मा, अभिजीत चंदा, गुरुमुख सिंह, सलावत महतो,एस के बसु, निभा शुक्ला, स्नेहा चंद्रवंशी, तरुण कुमारी को मुख्य रूप से शामिल किया गया है.




