जमशेदपुर : चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में 29 और 30 सितंबर को आयोजित ‘इंडस्ट्रियल ग्लोबल यूनियन बेस मेटल्स सेक्टर कॉन्फ्रेंस’ में टाटा वर्कर्स यूनियन के उपाध्यक्ष डॉ. शाहनवाज़ आलम ने भारत और जमशेदपुर का मजबूती से प्रतिनिधित्व किया. सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्योग जगत में हो रहे हरित परिवर्तन (ग्रीन ट्रांसफॉर्मेशन) के केंद्र में श्रमिकों के हित, सम्मानजनक रोजगार, सामाजिक संवाद और जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण होना अनिवार्य है. सम्मेलन के दौरान इंडस्ट्रियल ग्लोबल यूनियन के बेस मेटल्स सेक्टर निदेशक अलेक्जेंडर इवानोव के संचालन में आयोजित “जस्ट ट्रांजिशन एंड डीकार्बोनाइजेशन – सिक्योरिंग जॉब्स इन द ग्रीन ट्रांसफॉर्मेशन” सत्र में डॉ. आलम ने अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि डीकार्बोनाइजेशन की प्रक्रिया के साथ-साथ श्रमिकों की रोजगार सुरक्षा, उनके कौशल विकास (री-स्किलिंग व अप-स्किलिंग), पुनर्नियोजन, सामाजिक सुरक्षा और सार्थक भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए. उन्होंने टाटा स्टील के ऐतिहासिक ‘जॉइंट कंसल्टेशन सिस्टम’ को प्रबंधन और यूनियन की मजबूत साझेदारी का वैश्विक उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि इस तरह के संस्थागत संवाद के माध्यम से सुरक्षा, उत्पादकता, प्रशिक्षण, कल्याण और तकनीकी बदलाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर श्रमिक प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा सकती है. (नीचे भी पढ़े)

इसके अलावा, इंडस्ट्रियल बेस मेटल्स सेक्टर की सह-अध्यक्ष संज्योत वढावकर के संचालन में आयोजित “हेल्थ एंड सेफ्टी एंड साइकोलॉजिकल प्रेशर” सत्र में भी डॉ. आलम ने भाग लिया, जिसमें केन्या की जैकलीन सहित दुनिया के कई देशों के यूनियन प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. इस सत्र में डॉ. आलम ने कहा कि सुरक्षा को केवल दुर्घटनाएं रोकने तक सीमित नहीं माना जाना चाहिए. कार्यस्थल पर गर्मी, धूल, रसायन, भारी मशीनरी, काम का दबाव, पुनर्गठन और रोजगार की अनिश्चितता से उत्पन्न होने वाले मनोसामाजिक जोखिमों का समाधान भी बेहद जरूरी है. उन्होंने जोर देकर कहा कि सुरक्षा केवल दुर्घटना रोकने का विषय नहीं है, बल्कि श्रमिकों का शारीरिक स्वास्थ्य, मनोवैज्ञानिक कल्याण और उनकी गरिमा भी सुरक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए. सप्लाई चेन ड्यू डिलिजेंस और जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण पर बात करते हुए डॉ. आलम ने टाटा स्टील की ‘रिस्पॉन्सिबल सप्लाई चेन पॉलिसी’ का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि जिम्मेदार व्यवसाय का दायरा केवल कंपनी के अपने कर्मचारियों तक सीमित न रहकर सप्लायर्स, कॉन्ट्रैक्टर्स और पूरी वैल्यू चेन तक विस्तारित होना चाहिए. टाटा स्टील में सप्लायर्स से स्वास्थ्य व सुरक्षा, मानवाधिकार, पर्यावरण संरक्षण, निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं और स्थानीय सामुदायिक विकास के मानकों के पालन की अपेक्षा की जाती है और कंपनी इसके लिए एसेसमेंट व करेक्टिव एक्शन प्रोग्राम भी चलाती है. डॉ. आलम ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि जस्ट ट्रांजिशन, व्यावसायिक सुरक्षा और रिस्पॉन्सिबल सप्लाई चेन को आपस में जोड़कर ही उद्योग में टिकाऊ और श्रमिक-केंद्रित परिवर्तन लाया जा सकता है. दो दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में यूरोप, एशिया, अमेरिका और अफ्रीका समेत 40 से अधिक देशों के ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.







