जमशेदपुर : भारत सरकार द्वारा आइडीबीआइ बैंक का निजीकरण करने और इसकी हिस्सेदारी कनाडाई कंपनी ‘फेयरफैक्स’ को बेचने के फैसले के खिलाफ बैंक कर्मचारियों में भारी आक्रोश है. ऑल इंडिया पंजाब नेशनल बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन और बैंक एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (बेफी), सिंहभूम जिला कमेटी की ‘को-ऑर्डिनेशन कमेटी’ ने इस निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए इसे देशहित के पूरी तरह खिलाफ बताया है. संगठन के राज्य सचिव हीरा अरकने और बेफी के जिला सचिव सुजय राय ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि सरकार अपने निजीकरण के एजेंडे के तहत मुनाफे में चल रहे इस महत्वपूर्ण बैंक को विदेशी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है. उन्होंने याद दिलाया कि जब आइडीबीआइ संकट से जूझ रहा था, तब सरकार के दबाव में एलआईसी ने इसके शेयर खरीदे थे. वर्तमान में सरकार और एलआईसी के पास बैंक के 94 प्रतिशत शेयर हैं. भारी बैड लोन (एनपीए) से उबरकर बैंक अब लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहा है. पिछले तीन वर्षों में बैंक ने क्रमशः 5,600 करोड़, 7,500 करोड़ और 9,500 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है. इसमें आम जनता की लगभग 3,50,000 करोड़ रुपये की जमा पूंजी सुरक्षित है. (नीचे भी पढ़ें)
नेताओं ने आरोप लगाया कि जब आइडीबीआइ का बैंक में विलय हुआ था, तब संसद में आश्वासन दिया गया था कि सरकार की हिस्सेदारी कभी भी 51 प्रतिशत से कम नहीं होगी. लेकिन अब कैबिनेट द्वारा कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स को 60 प्रतिशत शेयर बेचने का निर्णय लेना न केवल निजीकरण, बल्कि विदेशीकरण है, जो केंद्र सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दावे के ठीक विपरीत है. इस निर्णय को अनुचित और अवांछनीय करार देते हुए यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स ने इसके विरोध का ऐलान किया है. निर्णय के विरोध में 16 अक्टूबर (शुक्रवार) को सभी बैंक कर्मचारी अपनी-अपनी शाखाओं में ‘काला बिल्ला’ लगाकर काम करेंगे और सरकार से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग करेंगे.





