जमशेदपुर : आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने कहा है कि पारसनाथ पहाड़ संताल आदिवासियों का सर्वाधिक बड़ा पूजा स्थल है, तीर्थ स्थल है और इसको मरांग बुरु या ईश्वर का दर्जा प्राप्त है। उन्होंने जैन धर्मावलंबियों पर इस पहाड़ को अनाधिकृत कब्जा कर लेने का आरोप लगाते हुए कहा है कि अब इस पर नया विवाद शुरू हो गया है। भारत सरकार और झारखंड सरकार को मिल बैठ कर अविलंब संताल आदिवासियों के सर्वाधिक बड़े तीर्थ स्थल को उन्हें पुनर्बहाल करना जरूरी है। अन्यथा यह भारत के आदिवासियों के ऊपर धार्मिक हमला और अन्याय का मामला बनता है। (नीचे भी पढ़ें)
श्री मुर्मू ने कहा है कि आदिवासी सेंगेल अभियान अपनी जायज मांग के लिए 17 जनवरी 2023 को भारत के 5 प्रदेशों के लगभग 50 जिलों में धरना-प्रदर्शन के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति को जिले के डीएम / डीसी के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित कर मरांग बुरू बचाओ आंदोलन की शुरुआत करेगा। उसके बाद जल्द ही भारत बंद या अन्य प्रभावी आंदोलन की घोषणा की जायेगी। साथ ही उन्होंने आदिवासी समाज के सभी सरना धर्मावलंबियों तथा संगठनों से इसमें सहयोग की अपील की है। (नीचे भी पढ़ें)
सालखन मुर्मू ने कहा है कि सरना धर्म (प्रकृति धर्म) कोड की मांग जायज है, संवैधानिक है। अतः 7 जनवरी 2023 को चाईबासा आ रहे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इस पर अपनी स्पष्ट राय जाहिर करना जरूरी है। अन्यथा कोल्हान आकर आदिवासी समाज के वोट के लिए जनसभा करने का उनका कोई नैतिक अधिकार नहीं बनता है। अमित शाह को अपना स्टैंड क्लियर करना जरूरी है। उम्मीद है अमित शाह आदिवासियों के ज्वलंत मुद्दों और चिंताओं को समझेंगे और उसका सम्मान करेंगे अन्यथा उनका चाईबासा प्रवास बेकार साबित हो सकता है।



