धनबादः धनबाद भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में साल 2002 से 2005 के बीच एक ऐसा घोटाला सामने आया था, जिसने बैंकिंग जगत को हिला कर रख दिया. यह मामला बैंक के इतिहास के सबसे अनोखे और बड़े घोटालों में से एक माना जाता है, जिसमें बैंक अधिकारियों, कर्मचारियों और कमीशन एजेंटों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये का खेल किया गया.बैंक की प्रक्रिया के अनुसार, जले और कटे-फटे नोटों को इकट्ठा कर डिस्पोजल के लिए रिजर्व बैंक भेजा जाता है. इस प्रक्रिया का लाभ उठाते हुए धनबाद करेंसी चेस्ट के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों ने ब्रजभूषण प्रसाद और करतार सिंह के साथ मिलकर एक सुनियोजित साजिश रची. (नीचे भी पढ़े)
नवंबर 2002 से जून 2005 के बीच बैंक से करीब 17 करोड़ रुपये मूल्य के जले-कटे नोटों की गड्डियां रिजर्व बैंक भेजी गई थीं. जब आरबीआई ने इन गड्डियों की जांच की, तो वहां चौकाने वाला खुलासा हुआ. गड्डियों के ऊपर और नीचे तो असली नोट थे, लेकिन उनके बीच में असली नोटों की जगह अखबार के कतरन और रद्दी कागजों को नोट के आकार में काटकर भर दिया गया था. जांच में कुल 1,25,47,950 रुपये की जगह रद्दी कागज बरामद हुए.इस सनसनीखेज घोटाले के उजागर होने के बाद, सीबीआई ने 31 अगस्त 2005 को मामला दर्ज किया. जांच में बैंक के दो अधिकारियों, पांच कर्मचारियों के अलावा मुख्य आरोपी ब्रजभूषण प्रसाद और करतार सिंह को नामजद किया गया. (नीचे भी पढ़े)
मामले के दर्ज होते ही जहां बैंक कर्मियों पर गाज गिरी और उन्हें निलंबित कर जेल भेजा गया, वहीं मुख्य आरोपी ब्रजभूषण और करतार रातों-रात देश छोड़कर फरार हो गए.सूत्रों के अनुसार, फरार होने के बाद दोनों आरोपी नेपाल में छिपे थे. वहां से लौटने के बाद वे अपनी पहचान बदलकर अलग-अलग राज्यों में रह रहे थे. वे लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे. सीबीआई पिछले कई महीनों से उनकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी. पुख्ता सूचना मिलने के बाद, सीबीआई ने कार्रवाई करते हुए ब्रजभूषण प्रसाद को महाराष्ट्र से और करतार सिंह को छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार कर लिया.







