
पटना : जिस प्रकार देश मे कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, कोरोना से संक्रमित मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे ने ट्रेन की एसी बोगियों को आइसोलेशन वार्ड में बदलने की योजना बनाई है। इसके तहत यात्री ट्रेनों को उन इलाकों में स्थापित किया जा सकता है, जहां पर संक्रमितों की संख्या अधिक है, लेकिन जगह की कमी महसूस की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के साथ रेल मंत्रालय की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में चर्चा हुई जिसमें सभी रेल मंडल और जोन के अधिकारी गुरुवार को कॉन्फ्रेंसिंग में शामिल हुए।

रेलवे इंजीनियरिंग विभाग को दी जाएगी जिम्मेवारी
आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए रेलवे इंजीनियरिंग विभाग को दो बोगियों की डिजाइन का काम सौंपा जाएगा। ट्रायल के बाद अन्य बोगियों को भी इसी तरह बदला जाएगा। इसमें सभी जरूरी आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाएगा। शौचालय से लेकर वेंटीलेटर तक कैसे काम करेगा, इसका खाका तैयार किया जा रहा है। इसमें परामर्श कक्ष, मेडिकल स्टोर, गहन चिकित्सा कक्ष और रसोईयान (पैैंट्रीकार) की सुविधा मिल सकती है। व्यवस्था लागू होने के बाद सभी एक्सप्रेस ट्रेनों की एसी बोगियों में इसकी समुचित व्यवस्था कराई जा सकती है। कई एक्सप्रेस ट्रेनों में बॉयो टॉयलेट की व्यवस्था है। रेलवे की उत्पादन इकाइयों का उपयोग जीवन रक्षक प्रणाली (वेंटीलेटर), बिस्तर, ट्रॉली आदि के निर्माण में किया जा सकता है। समस्तीपुर रेल मंडल के डीआरएम अशोक माहेश्वरी ने कहा कि रेल मंत्रालय स्वास्थ्य विभाग के साथ ट्रेनों की बोगियों में आइसोलेशन वार्ड बनाने को ले कर विचार कर रहा है। इसके लिए खाका तैयार किया जा रहा है। पहले दो बोगियों को आइसोलेशन वार्ड के लिए डिजाइन किया जाएगा। फिर इसका ट्रायल होगा। इसके बाद यह सुविधा बहाल की जाएगी।







