
जमशेदपुर : जमशेदपुर के मानगो थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राजीव रंजन सिंह को गिरफ्तार किया गया है. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने उनको 25 हजार रुपये घूस लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा है. वे थाना कक्ष में ही घूस लेते हुए पकड़े गये है. इस घटना ने इस बात की पोल खोल दी है कि किस तरह थानों में भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है. किस तरह आम आदमी के साथ अत्याचार किया जा रहा है. किसी भी केस में फंसे व्यक्ति के साथ किस तरह मुद्रादोहन किया जा रहा है और किस तरह पुलिस सिक्को की खनक पर खेलते रहते है. इसका वाक्या भी सामने आ गया. (नीचे देखे पूरी खबर)

इंटक नेता ने भ्रष्टाचार को दिया जवाब
यूथ इंटक नेता बलजीत सिंह मानगो दाइगुट्टू काली मंदिर के पास रहने वाले है. 5 नवंबर को वे कार से बागबेड़ा से मानगो की ओर जा रहे थे. इसी बीच रास्ते में मानगो चौक के पास एक व्यक्ति शाकिब अंसारी के साथ उनके भाई का झगड़ा हो गया. दोनों तरफ से हाथापायी के दौरान शाकिब अंसारी के सिर में चोट लग गयी तो शाकिब अंसारी ने मानगो थाना में बलजीत सिंह के भाई बलदेव सिंह के ऊपर मानगो थाना में एफआइआर दायर कर दिया. इसके बाद दोनों के बीच समझौता हो गया. कोर्ट से दोनों के बीच समझौता पर साइन भी हो गया और बेल भी मिल गया. इसके बावजूद थाना प्रभारी गैर जमानतीय धारा 379 को हटाने के नाम पर 50 हजार रुपये का डिमांड करने लगे. कई बार उनको फोन पर धमकाया गया. इसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत एसीबी से की. (नीचे भी पढ़ें और वायरल ऑडियो सुनें)
बलजीत सिंह ने कहा कि वे कई बार थानेदार को बोले कि आपसी समझौता हो चुका है, लेकिन फिर भी थानेदार डरा रहे थे कि झूठे मुकदमा में फंसाकर जेल भेज देंगे. इसके बाद वे एसीबी के पास गये और शिकायत की. शिकायत को सही पाया गया. इसके बाद गुरुवार की सुबह 25 हजार रुपये घूस लेकर बलेदव सिंह जैसे ही थाना प्रभारी के पास गया और थाना प्रभारी ने पैसे ले लिये, वैसे ही एसीबी की टीम ने उनको रंगेहाथ पकड़ लिया. थाना प्रभारी राजीव रंजन सिंह पटना के जाकीपुर के महुनीपुर गांव के स्थायी तौर पर रहने वाले है.
शिकायतकर्ता इंटक नेता पर चली थी गोली
मानगो दाइगुट्टू निवासी बलजीत सिंह इंटक के नेता है और कांग्रेस से भी जुड़े रहे है. वर्ष 2017 में बलजीत पर मानगो में ही गोली भी चली थी, जिस कारण वह सतर्क रहता है. बलजीत ने बताया कि 5 नवंबर को जो घटना घटी थी, उस घटना भी सतर्कता का ही हिस्सा था, जिसमें झगड़ा हो गया था. बाद में आपसी समझौता भी हो गया था. लेकिन पुलिस चाहती थी कि किसी तरह इस मामले में अवैध वसूली कर ली जाये.





