
जमशेदपुर : जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल की वैसे तो कई सारी कहानियां सामने आती है, लेकिन इस बार लॉकडाउन और कोरोना वायरस के खतरे के बीच एक और मामला सामने आया. इसमें खुद जिला प्रशासन भी भागीदार बनी रही. एमजीएम अस्पताल में बच्चा जन्म देने वाली मां श्रीमति लागुरी को बच्चा के साथ डिस्चार्ज कर दिया गया. रोज कमाने और खाने वाले पति प्रधान लागुरी के साथ नवजात बच्चे और एक और बच्चे के साथ वे लोग जाने के लिए गाड़ी और एंबुलेंस का डिमांड करते रहे, लेकिन नहीं मिल पाया.
इसके बाद वे लोग अस्पताल से बाहर निकलकर किसी तरह पैदल ही एमजीएम अस्पताल से बिष्टुपुर स्थित पार्वति घाट के किनारे पर पहुंच गये. वे लोग नदी किनारे पर ही दस दिनों से ही पड़े रहे. 22 अप्रैल को उनकी छुट्टी हुई थी. इसके बाद से वे लोग वहीं पर रहे थे. वहां सामाजिक कार्यकर्ताओं की नजर पड़ी. इसके बाद पुलिस को खबर दी, जब नहीं माने तो लोगों ने भाजपा नेता और खादी बोर्ड के सदस्य कुलवंत सिंह बंटी को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद उपायुक्त रविशंकर शुक्ला तक मामला पहुंचा. मामला स्वास्थ्य सचिव तक भेजा गया, जिसके बाद उसको वहां से ले जाकर क्वारंटाइन सेंटर ले जाया गया, जहां कोरोना के संदिग्ध लोगों को रखा जाता है.
एक महिला को कदमा के क्वारंटाइन सेंटर में रखने की जानकारी मिलते ही फिर से उपायुक्त को शिकायत की गयी. जिसके बाद किसी तरह उसको रोका गया. अंतिम समाचार लिखे जाने तक उसको वापस पश्चिम सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर में नहीं भेजा गया है. उसको भेजने की कवायद चल रही है.














